इटावा। बाबा साहेब डॉ. बीआर आंबेडकर कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में 144 सीटों पर अभी तक सिर्फ 56 छात्र-छात्राओं ने ही प्रवेश लिया है। पूर्व डीन कॉलेज में प्लेसमेंट की सुविधा न होने को इसका कारण मान रहे हैं। अन्य 88 सीटों को भरने के लिए महाविद्यालय प्रशासन सीएसए की काउंसलिंग पर नजर जमाए है।
महाविद्यालय में मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर व एग्रीकल्चर साइंस में 36-36 सीटें हैं। सितंबर में हुई पहली काउंसलिंग के बाद मैकेनिकल में एक, इलेक्ट्रानिक्स में छह, कंप्यूटर साइंस में 29 और एग्रीकल्चर साइंस में 20 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है। कुल 56 सीटें ही भर पाई हैं जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 66 थी। तब मैकेनिकल और इलेक्ट्रानिक्स में आठ-आठ, कंप्यूटर साइंस में 20 और एग्रीकल्चर में 30 सीटों पर प्रवेश हुए थे।
कम फीस में अधिक सुविधाएं होने के बाद भी राजकीय इंजीनियर कॉलेज में सीटों का न भर पाना चिंता का विषय है।
पिछले चार सालों से लगातार छात्र संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि सीधे प्रवेश का विकल्प खुला है लेकिन इसके लिए विश्वविद्यालय की स्वीकृति लेनी होगी।
मैकेनिकल में एक और इलेक्ट्रॉनिक्स में छह ही छात्र
पिछले चार सालों में खासतौर से मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग का आकर्षण कम हुआ है। कंप्यूटर और एग्रीकल्चर साइंस से तुलना करें तो इन दोनों ट्रेडों में छात्र संख्या न के बराबर है। मैकेनिकल में इस बार एक छात्र ने ही प्रवेश लिया है। जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स में छह छात्रों ने रुचि दिखाई है। पूर्व डीन प्रो. देवेंद्र सिंह ने बताया कि मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कम अवसर होने के कारण ऐसा है। जबकि कंप्यूटर और एग्रीकल्चर में स्थिति ठीक है। छात्र कॉलेज का चयन करने से पहले यह भी देखते हैं कि कैंपस सेलेक्शन है कि नहीं। कॉलेज में यह सुविधा न होने का भी असर दिख रहा है।
निजी कॉलेजों से कम फीस के बाद भी ये हाल
इंजीनियरिंग कॉलेज की बात करें तो यहां एक सेमेस्टर की फीस 30 हजार रुपये है। चार साल में आठ सेमेस्टर की बात करें तो कुल फीस 2.40 लाख रुपये होती है। यहां हॉस्टल की फीस भी छह हजार रुपये सालाना है। निजी कॉलेजों से अगर तुलना करें तो यह आधी से भी कम बैठती है। इसके बाद भी सीटें खाली हैं।
यह सही है कि कॉलेज की सीटें आधी से कम भरी हैं। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर में गुरुवार को होने वाली काउंसलिंग से बड़ी उम्मीदें हैं। इससे उनके कॉलेज में भी छात्र संख्या बढ़ सकती है। शुक्रवार तक इसकी सूचना उपलब्ध हो जाएगी। - एनके शर्मा, डीन, इंजीनियरिंग कॉलेज, इटावा।