इटावा। बुआई से लेकर उपज तक का सटीक आकलन हो सके, इसके लिए एग्रीस्टेक परियोजना को रबी फसली वर्ष में पूरे जिले के 654 गांवों में लागू किया गया है। फसलों के रियल टाइम सर्वेक्षण के लिए एग्रीस्टेक परियोजना के तहत डिजिटल क्रॉप सर्वे शुरू करा दिया गया है। इससे यह पता चलेगा कि किस किसान ने अपने खेत में कौन सी फसल बोई है। इसका सटीक आकलन शासन तक पहुंचेगा।
जिले में बाढ़, आपदा व सूखा जैसी दैवी आपदाओं की स्थिति में फसलों को होने वाले नुकसान के एवज में सटीक मुआवजा दिलाने में इस सर्वे रिपोर्ट से मदद मिलेगी। जिले में कौन सी फसल कितने रकबा में बोई जा रही है, इसका कृषि व राजस्व विभाग के कर्मचारी पहले मैनुअल तरीके से सर्वे कर सरकार को आंकड़े उपलब्ध कराते थे। उसमें पूरी तरह से आंकड़े सही उपलब्ध नहीं होते थे। लेकिन अब डिजिटल सर्वे से सटीक आंकड़े शासन तक उपलब्ध हो सकेंगे। एक जनवरी से शुरू हुआ सर्वे 15 फरवरी तक चलेगा।
डिजिटल क्राॅप सर्वे के लिए लेखपाल, पंचायत सहायक और कृषि विभाग के कर्मचारियों को शामिल किया गया है। सर्वे करने के लिए खास तौर पर तैयार किए गए एप का इस्तेमाल किया जा रहा है। एप पर डाटा अंकित करने के लिए सभी को प्रशिक्षित भी किया जा चुका है। इसमें कुल 273 कर्मचारियों को लगाया गया है।
सर्वे से किसानों को होगा यह लाभ
-सर्वे से विभिन्न योजनाओं का किसानों को लाभ मिलेगा।
-बैंक की ओर से फसली ऋण का सत्यापन किया जा सकेगा।
-फसल बीमा प्रस्ताव का सत्यापन हो सकेगा।
-न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पाद की खरीद, सूखे, अतिवृष्टि के दौरान फसल नुकसान होने पर राहत अनुदान का वितरण।
-सकल घरेलू उत्पाद का अनुमान सहित किसानों के संस्थागत खरीदारों से जोड़ने के अवसर के साथ ही लक्षित फसल सलाह भी प्रदान की जाएगी।
32 गांवों में नहीं हो पाएगा ऑनलाइन सर्वे
जिले में 686 राजस्व गांव है इस सर्वे में सिर्फ जिओ रिफ्रेंस्ड वाले गांवों को जोड़ा गया है। जिओ रिफ्रेंस्ड से 32 गांव जुड़े न होने के कारण उनमें सर्वे नहीं हो पाएगा। सर्वे करने वाले कर्मचारी को प्रति गाटा पांच रूपए का भुगतान किया जाएगा। प्रत्येक कर्मी को कम से कम 2250 और अधिकतम 3500 गाटों का सर्वे करने के लिए चयनित किया गया है। उसंभागीय कृषि प्रसार अधिकारी धीरज कुमार ने बताया कि सर्वे के लिए कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी पूरा करवा दिया गया है।
वर्जन
जनपद में बोई जाने वाली फसलों की सटीक जानकारी एकत्र करने के लिए एग्रीस्टेक के माध्यम से सर्वे शुरू करा दिया गया है। इससे उत्पादन, खाद व बीज की उपलब्धता इत्यादि योजनाएं तैयार हो सकेंगी। -आरएन सिंंह, उपकृषि निदेशक