इटावा। अभ्युदय निशुल्क कोचिंग सेंटर सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं की राह आसान करती दिख रही है। 50 छात्र-छात्राएं आईटीआई परिसर में बने केंद्र में पढ़कर उम्मीदों की उड़ान भर रहे हैं।
जिले से हर साल बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं 12वीं और स्नताक में उत्तीर्ण होने के बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहते हैं। दिल्ली, लखनऊ की कोचिंगों की भारी-भरकम फीस और वहां रहने का खर्च कई होनहार विद्यार्थियों की उम्मीदों पर पानी फेर देता था। सरकार की अभ्युदय योजना शुरू होने के बाद जिले में निशुल्क कोचिंग सेंटर स्थापित किया गया। इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को सिविल परीक्षाओं की तैयारी करने का मौका मिला।
दाखिले के लिए जून में प्रवेश परीक्षा कराई गई थी। इसमें 50 छात्र-छात्राओं का चयन हुआ। अब यह सभी अभ्यर्थी शहर के आईटीआई परिसर में कोचिंग ले रहे हैं। आठ शिक्षक इन्हें पढ़ा रहे हैं। इनमें वह शिक्षक भी शामिल हैं जो सिविल की मेन्स परीक्षा पास कर चुके हैं। इनके अलावा डिग्री कॉलेज के शिक्षक भी हैं। समाज कल्याण अधिकारी ललिता यादव ने बताया कि कक्षाएं सुबह आठ बजे से 11 बजे तक चल रही हैं। एक विषय की क्लास डेढ़ घंटे की होती है। बच्चों से शिक्षकों के पढ़ाने का फीडबैक भी समय-समय पर लिया जाता है।
चयन की उम्मीद बढ़ी
अभ्युदय के तहत कोचिंग कर रहे आशीष कुमार ने बताया कि वह स्नातक करने के साथ ही सिविल सर्विसेज की तैयारी करना चाहते थे, लेकिन जिले में कोई व्यवस्था न होने की वजह से सिर्फ घर में पढ़ रहे थे। अभ्युदय के बारे में जानकारी होने पर परीक्षा दी और दाखिला ले लिया। उम्मीद है कि चयन होगा और वह भी अधिकारी बनेंगे।
छात्र धर्मेंद्र यादव ने बताया कि लोगों को लगता था कि सिर्फ बाहर जाकर ही सिविल सर्विसेज की तैयारी की जा सकती है, पर अब यह भ्रम टूट गया है। शिक्षक लगन से पढ़ा रहे हैं। हम लोगों की भी पूरी कोशिश रहती है कि मेहनत करके आगामी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
अभ्युदय से मिला सहारा
बुधवार को कोचिंग करने के बाद कक्षा से निकले अभिषेक कठेरिया ने बताया कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी का मन बहुत पहले बनाए थे, लेकिन पारिवारिक स्थितियों की वजह से बाहर नहीं जा सका। अभ्युदय के संबंध में जानकारी मिलने पर प्रवेश परीक्षा दी। इसमें पास होने के बाद से यहां जून से कोचिंग कर रहा हूं।
छात्र जितेंद्र ने बताया कि सिविल सर्विसेज में तैयारी करने का बहुत मना था, लेकिन इसकी तैयारी के लिए जिले में कोई व्यवस्था नहीं थी। बाहर जाने पर बहुत खर्चा आ रहा था। ऐसे में उम्मीद टूट रही थी, पर अभ्युदय कोचिंग में पढ़कर चयन की उम्मीद जगी है।