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Etawah News: 60 करोड़ खर्च फिर नहीं बदली स्कूलों की सूरत

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प्राथमिक विद्यालय नगला लछी में बिना छत का शौचालय। संवाद - फोटो : ETAWAH
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इटावा। 1484 स्कूलों का कायाकल्प कराने में चार साल में करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद स्कूलों के हैंडपंप खराब हैं और टंकियों की टोटियां टूटी हैं। फर्नीचर न होने से बच्चे दरी बिछाकर जमीन पर बैठाए जा रहे हैं।
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प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में कायाकल्प योजना शुरू की थी। शुद्ध पेयजल, बालक-बालिका शौचालय व मूत्रालय, शौचालय में नल, टाइल्स लगवाना, दिव्यांग शौचालय, श्याम पट्ट, रसोई घर, रंगाई-पुताई. दिव्यांगों के लिए रैंप, वायरिंग, हैंडवॉश यूनिट, विद्यालय में विद्युत संयोजन, सबमर्सिबल नल से जलापूर्ति, फर्नीचर व बाउंड्रीवाल समेत बिंदुओं पर काम कराया जाना था।
चार वर्षों में वायरिंग, श्याम पट्ट और रंगाई-पुताई के कार्य ही शत प्रतिशत कराए जा सके हैं। 1484 में 1300 विद्यालयों में ही फर्नीचर की व्यवस्था की गई है।
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जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे बच्चे
कंपोजिट विद्यालय बकेवर में प्राथमिक स्तर के बच्चे जमीन पर बैठाए जाते हैं। यहां छात्र-छात्राओं की संख्या 225 है। विद्यालय में 110 मीटर में इंटरलॉकिंग कराई गई है। मैदान पर डेढ़ फीट गहरा गड्ढा होने से बच्चे खेल नहीं पाते हैं। प्रधानाचार्य बलराज चतुर्वेदी ने बताया इस संबंध में नगर पंचायत कार्यालय को कई बार पत्र लिखा लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। फर्नीचर मांग भी की गई है।
बल्लमपुर स्कूल में पर्याप्त फर्नीचर नहीं
विद्यालय में 42 छात्र हैं। विद्यालय में टाइल्स तो लग गए हैं लेकिन सभी बच्चों के लिए फर्नीचर नहीं है। प्रधानाध्यापक जयप्रकाश ने बताया कि विद्यालय में मात्र 15 सेट फर्नीचर है। 10 से 12 बच्चों के लिए फर्नीचर कम है। कक्ष कम हैं। कक्षों की दीवारें व छत में दरारें हैं। छत की सरिया दिखाई देती हैं। दिव्यांग बच्चों के लिए टॉयलेट बनवाया जा रहा है।
बच्चे 92, फर्नीचर सिर्फ 75 के लिए
प्राथमिक विद्यालय कोठी शेरपुर में 92 बच्चों के सापेक्ष 75 के लिए ही फर्नीचर है। विद्यालय में चार कमरें हैं। इनमें टाइल्स लगे हैं। प्रधानाचार्या मंजली श्रीवास्तव ने बताया कि फर्नीचर कम होने से बच्चों को बैठाने में समस्या आती है। कोरोना का डर है लेकिन फिर भी एक सीट पर तीन से चार बच्चों को बैठाना पड़ता है। ज्यादा समस्या होने पर बच्चे जमीन पर पट्टी बिछाकर बैठते हैं। दिव्यांग बच्चों के लिए टॉयलेट का निर्माण चल रहा है।
टोटी गायब, हैंडपंप भी खराब
कंपोजिट विद्यालय सलेमपुर में 73 बच्चे हैं। मंगलवार को कुल 23 बच्चे उपस्थित थे। स्कूल में लगीं टाइल्स और पानी की टोटियां टूटी हुई थीं। यहां का नल भी खराब है। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय गरामपुर में टाइल्स, टोटिया और फर्श टूटा पड़ा था। यहां कायाकल्प से हुए काम की गुणवत्ता ठीक नहीं मिली। बाउंड्रीवॉल चटकी हुई है। कूड़े के ढेर लगे हुए थे।
शौचालय में छत ही नहीं
प्राथमिक विद्यालय नगला लछी में एक शौचालय पर छत नहीं है। सबमर्सिबल करीब दो माह से खराब है। प्राथमिक विद्यालय नगला गडरियान में फर्नीचर उपलब्ध नहीं हुआ है। बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाया जाता है। प्रधानाचार्य की ओर से डिमांड भेजी भी जा चुकी है।
बेसिक शिक्षा विभाग स्तर के ज्यादातर काम पूरे करा दिए गए हैं। ज्यादातर काम ग्राम पंचायत निधि से कराए जा रहे हैं। जिला पंचायती राज विभाग इसकी निगरानी करता है। प्रधान कार्यों में रुचि नहीं दिखाते हैं, इससे कुछ काम अधूरे हैं। - हरेंद्र, जिला समन्वयक निर्माण, बेसिक शिक्षा विभाग।
विभाग की ओर से ज्यादातर कम करा दिए गए हैं। जो काम हो गए हैं उनके रखरखाव की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंध समिति की होती है। प्रबंध समिति इस पर ध्यान नहीं देती। टोटी टूट जाए तो उसे लगवाया नहीं जाता। फर्नीचर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की है।
- बनवारी सिंह, डीपीआरओ

कंपोजिट वफिद्यालय सलेमपुर में हैंडवॉश की गायब टोटियां व टूटे टाइल्स। संवाद- फोटो : ETAWAH

कंपोजिट विद्यालय सलेमपुर में खराब हैंडपंप। संवाद- फोटो : ETAWAH

प्राथमिक विद्यालय कोठी शेरपुर में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे। संवाद- फोटो : ETAWAH

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