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Etawah News: संजीवनी देने वाले 50 वेंटिलेटर एक साल से चल रहे ‘बीमार’

Sun, 07 May 2023 12:30 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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सैफई। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कई गंभीर मरीजों को जीवनदान दे चुके 50 वेंटिलेटरों को इलाज की दरकार है। एक साल से इनमें खराबी है। कोरोना के मामले भी फिर से मिलने शुरू हो गए हैं। ऐेसे में इनका ठीक होना भी जरूरी है।
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कोरोना की पहली लहर के बाद बिगड़ते हालातों को काबू करने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रधानमंत्री केयर फंड से वेंटिलेटर भिजवाए गए थे। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में भी 134 वेंटिलेटर भेजे गए थे। 2021 से ही इन वेंटिलेटर में तकनीकी समस्याएं आनी शुरू हो गईं थी। किसी का मास्क खराब हो गया तो किसी का ट्यूब खराब होने लगा। ऐसे स्थिति में करीब 50 वेंटिलेटर उपयोग के लायक नहीं बचे। इनकी मरम्मत के लिए विवि प्रशासन की ओर पत्र लिखा गया, लेकिन साल भर बाद भी इन वेंटिलेटर की मरम्मत नहीं हो सकी है।

विवि के पास 200 वेंटिलेटर होने का दावा
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में लगातार शासन को पत्र लिखे जा रहे हैं। उनका दावा है कि उसके पास करीब 200 वेंटिलेटर हैं। विषम परिस्थिति में भी फिलहाल निपटने की पूरी तैयारी है।
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भारत में बने हैं वेंटिलेटर
विशेषज्ञों की मानें तो वेंटिलेटर जर्मनी और अमेरिका से मंगाए जाते हैं। कोविड के दौरान सभी आवागमन बंद होने की वजह से उक्त दोनों देशों से वेंटिलेटर आना संभव नहीं था। ऐसे में देश में ही इन वेंटिलेटर को तैयार किया गया था। विदेश से आने वाला एक वेंटीलेटर लगभग 15 लाख रुपये का था, जबकि पीएम केयर फंड से खरीदे वेंटिलेटर की लागत लगभग चार लाख रुपये है। अस्पताल प्रशासन की ओर से खरीदे गए वेंटिलेटर की कीमत करीब 15 लाख रुपये है।


शासन को कई बार पत्र लिखे गए हैं। जल्द ही ख़राब वेंटिलेटरों को सही कराया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन के पास खुद के लगभग 200 वेंटिलेटर हैं। कोविड-19 के लिए यहां पहले से ही सभी व्यवस्थाएं हैं। - डॉ. चंद्रवीर सिंह, प्रभारी कुलसचिव विश्वविद्यालय
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25 दिन में मिल चुके हैं कोरोना के 26 मरीज
25 दिन में जिले में कोरोना के 26 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से लगभग 10 मरीज आयुर्विज्ञान विवि के स्टाफ ही थे। इनमें एक सक्रिय केस है।
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