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Etawah News: 50 शैया अस्पतालों को मिली रफ्तार, ट्रॉमा सेंटर का इंतजार

Fri, 29 Dec 2023 12:05 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इटावा। यह साल चिकित्सा सेवा की छोटी जरूरतों को तो पूरा कर सका, लेकिन बड़ी जरूरतें अभी भी अधूरी हैं। शहर और बकेवर के 50 शैया अस्पतालों को कुछ रफ्तार तो मिल सकी, लेकिन जिला अस्पताल और सैफई मेडिकल कॉलेज के हाथ कुछ खास नहीं लग सका। शहर और बकेवर के 50 शैया अस्पताल को कुछ डॉक्टर मिले हैं। अभी जरूरत है। वहीं, जिला अस्पताल में सिर्फ हड्डी रोग का इलाज ही मिल रहा है। विशेषज्ञों की कमी होने से ट्रामा सेंटर अभी तक यह सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सका। वहीं आयुर्विज्ञान विवि में भी बन रहे सुपर स्पेशलिटी 500 और 300 बेड का अस्पताल पूरा नहीं हो सका।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। इस साल जिले की चिकित्सा सेवा को कुछ खासा नहीं मिल सका। शहर के छैराह स्थित 50 शैया अस्पताल कागजों 10 पहले शुरू तो कर दिया गया था, लेकिन स्टाफ न होने की वजह से इसकी सेवाएं जनता को नहीं मिल पा रही थीं। आंख के डॉक्टर, होम्यापैथी डॉक्टर और कुछ नर्सिंग स्टाफ इस साल मिलने के बाद यहां की सेवाएं शुरू हो गई थीं।
वहीं बकेवर के 50 शैया अस्पताल की इमारत 2007 में बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन कोई उपकरण और स्टाफ न मिलने की वजह से यह सालों तक बंद पड़ा रहा है। इस साल यहां भी शासन से स्टाफ देने के बाद यहां व्यवस्थाएं सुचारू हो सकीं। हालांकि दोनों की जगह पर सिर्फ ओपीडी की ही व्यवस्था है।
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मरीजों को भर्ती करने का इंतजाम अभी तक नहीं हो सका है। उधर, जिला अस्पताल का ट्रामा सेंटर 2016 में बना दिया गया था, लेकिन उपकरणों और स्टाफ कमी से यह सिर्फ हड्डी रोग विभाग बनकर रह गया है। हादसे में घायल होने वाले मरीजों को इमरजेंसी से ही देखकर आयुर्विज्ञान विवि रेफर कर दिया जाता है।





सीएचसी स्तर पर ऑपरेशन की सुविधाएं शुरू हुईं
इस साल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को चिकित्सा सेवा से एक और राहत मिली है। जिले की आठ सीएचसी में से महेवा और ताखा पर गर्भवतियों के ऑपरेशन की सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। ऐसे में अब गर्भवती को लेकर तीमारदारों को जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज तक दौड़ नहीं लगानी पड़ती है।


सैफई के 500 और 300 बेड के अस्पताल भी नहीं हो सके शुरू

सपा सरकार में 2015 में आयुर्विज्ञान विवि में 500 बेड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और तीन सौ बेड गायनी अस्पताल बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई थी। यह काम 2023 में भी पूरा नहीं हो सका। बजट के अभाव में दोनों जगहों का काम इस साल काफी समय तक रुका रहा। हालांकि अब 500 बेड अस्पताल का काम पूरा होने की कगार पर है। सिर्फ पांच प्रतिशत काम ही बचा है।
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