इटावा। तापमान के लगातार बढ़ने और पारा 42 डिग्री पहुंचने से गर्मी से लोग परेशान हैं। दोपहर में तेज धूप लोगों को झुलसा रही है। हाल ये है कि सड़कों पर सन्नाटा दिखा। वहीं जहां जिसे छांव दिखी वहीं ठहर गया।
अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में ऐसा हाल है तो आगे क्या होगा, यही सोचकर लोग बेहाल हैं। लोग अंगौछे से सिर ढंककर जाते दिखे। बच्चों को महिलाओं ने आंचल में छिपा लिया ताकि उन्हें धूप न लगे। नीबू पानी, गन्ने, का रस की दुकानों पर भीड़ दिखी। रेलवे स्टेशन पर समाजसेवी संस्था के सदस्यों ने यात्रियों को पानी पिलाया।
वहीं किसानों को फसलों की सिंचाई की चिंता सता रही है। सब्जियों को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। आम को भी नुकसान होने की आशंका है। ज्यादा गर्मी में टमाटर के सिकुड़ने की आशंका है।
किसानों को सताई सिंचाई की चिंता
ताखा क्षेत्र के गांव खरगुआ निवासी नाथूराम ने बताया कि मूंग और मक्का की फसल को इस समय पानी की बहुत जरूरत है। दिन में गेहूं की कटाई करनी है। बिजली न मिलने से ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं। परेशानी तो हो रही है।
ताखा क्षेत्र के गांव सुकैया निवासी सुंदरलाल ने बताया कि मूंग, मक्का और मूंगफली की फसल लगा रखी है। सबसे ज्यादा पानी मक्का को चाहिए लेकिन नलकूप न चलने से फसल सूख रही है। गर्मी में फसल बचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। खेतों में नमी बनाए रखने की चिंता सता रही है।
नमी बनाए रखने के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाएं
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ.विजय बहादुर जायसवाल ने बताया कि अप्रैल और मई में सब्जियां और फसलें पानी की कमी से सूख जाती हैं। लू का भी प्रकोप रहता है। पारा चढ़ने पर जमीन में पर्याप्त नमी बनाए रखने के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनानी चाहिए। 45 डिग्री या उससे अधिक तापमान में केला, पपीता, टमाटर समेत अन्य फसलें झुलसने लगती हैं। इसके लिए किसान फसल के आसपास मक्का, नेपियर घास समेत अन्य फसल लगा सकते हैं। इससे फसलों पर लू का सीधा असर नहीं पड़ता है।