इटावा। एच3एन2 संक्रमण और मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों के सामने बड़ा संकट है। सीएचसी स्तर पर डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है। हालत यह है कि जिले की आठों सीएचसी में डॉक्टरों के 33 पद खाली हैं। कई पर महिला चिकित्सकों की तैनाती नहीं है।
इन सीएचसी पर 59 पद सृजित हैं। राजपुर सीएचसी की बात करें तो यहां 14 पदों के सापेक्ष दो ही चिकित्सक हैं। भरथना सीएचसी में छह की जगह चार ही डॉक्टर हैं। ताखा में ओपीडी की बात करें तो रोजाना करीब 150 मरीज पहुंचे हैं। एक डॉक्टर की नाइट ड्यूटी होने के कारण दिन में स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है। जसवंतनगर सीएचसी में तीन फिजीशियन और एक महिला डॉक्टर है। बाल रोग, हड्डी रोग विशेषज्ञ और जनरल सर्जन के साथ फिजीशियन का भी एक पद खाली है। सीएमओ स्तर से हर महीने इसकी रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाती है लेकिन समस्या दूर नहीं हो पा रही है। अन्य सीएचसी का भी यही हाल है।
लगानी पड़ रही लंबी दौड़
राजपुर क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी के कारण यहां के मरीजों को करीब 40 किलोमीटर की दूरी तय करके जिला अस्पताल आना पड़ता है। सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं और बाल रोगियों को होती है। करीब सवा घंटे का सफर तय करने के बाद जिला अस्पताल में भी इलाज मिलने में घंटों लग जाते हैं। घर पहुंचने में शाम हो जाती है। ऐसे में मरीजों को परेशानी होती है। बसरेहर सीएचसी से महिला मरीजों को 10 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। महेवा में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। यहां के मरीजों को 35 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
सीएचसी सृजित पद रिक्त
भरथना 6 2
बसरेहर 4 2
महेवा 6 4
ताखा 8 3
उदी 6 3
सैफई 7 3
जसवंतनगर 8 4
राजपुर 14 12
वर्जन
डॉक्टरों की कमी हर जगह है। हर माह रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है। इसके बाद भी डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो पा रही है। सीएचसी स्तर पर डॉक्टर कम होने के कारण जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है और इलाज मिलने में कुछ परेशानी होती है। - डॉ. गीताराम, मुख्य चिकित्साधिकारी।