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क्लेम बिगाड़ रहा आयुष्मान का गेम

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इटावा। गरीबो के लिए पांच लाख रुपये का मुफ्त इलाज के शुरू की गई केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना में क्लेम का पेच
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अभिशाप बनता जा रहा है। क्लेम लेने के लिए स्पष्ट गाइड लाइंस न होने से प्राइवेट हॉस्पिटल येाजना में रुचि नहीं दिखा रहे
हैं। योजना शुरू होने के चार माह बाद तक का जो डाटा आया है, वह बेहद चौंकाने वाला है।
इस दौरान मात्र 385 लाभार्थियों
का इलाज हुआ है। इसमें से ज्यादातर मरीज सरकारी अस्पतालों में गए जबकि सात से अधिक हॉस्पिटल प्राइवेट अस्पताल भी
योजना में शामिल हैं। सभी अस्पतालों में पांच से कम लाभार्थियों का ही इलाज किया गया।

प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के मैनेजमेंट से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने क्लेम मिलने में हो रही देरी को इसकी
बड़ी वजह बताया। पड़ताल में पता चला कि पैनल में शामिल आधे से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल इस स्कीम को लेकर रुचि नहीं
दिखा रहे। दरअसल क्लेम में देरी और इलाज के पैकेज इसकी बड़ी वजह हैं।
कई को प्रोसेज की ही जानकारी नहीं दी
गई।
आयुष्मान योजना के प्रभारी डॉ आशीष का कहना है कि जिले में 95 हजार लोगों को आयुष्मान योजना का लाभ दिया
जाना है। इसके तहत 21 हजार लोगों को गोल्डन कार्ड बन गये। इनमें से 16 अस्पतालों को चयन किया गया। इसमें जिला
अस्पताल जिला महिला अस्पताल, सैफई मेडिकल कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व आठ प्राइवेट अस्पताल दीपकिरण,
सुशीला नर्सिंगहोम, सूर्या नर्सिंगहोम, दिव्यांशी, जेके हॉस्पिटल, एलसी हॉस्पिटल को शामिल किया। इनमें से अधिकांश लोगों
का इलाज सरकारी अस्पतालों में हुआ है।
प्राइवेट अस्पताल में इलाज का लाभ कम लोगों को मिला है। इसमें तेजी दिखाने के
लिए लगातार जोर दिया जा रहा है। क्लेम भी मिलना शुरू हो गया। प्राइवेट हॉस्पिटल से संख्या बढ़ाने के लिये कहा गया।
इनसेट
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फंसी है क्लेम की रकम
बीते साल 23 सितंबर को आयुष्मान भारत योजना लांच की गई थी। पांच लाख रुपये तक के मेडिकल इंश्योरेंस वाली इस
स्कीम से में जनपद के ज्यादा लाभार्थी है। जिले में प्राइवेट अस्पतालों को इस योजना से जोडने के लिये डीएम और स्वास्थ्य
विभाग ने पहल की। इसके बाद 16 सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल योजना से जुड़ गए। वहीं, सरकारी अस्पतालों में
सबसे अधिक मरीजों का इलाज जरूर हुआ है। लेकिन 200 लाभार्थियों के क्लेम की रकम मिली है। अभी तक 185
लाभार्थियों का क्लेम नहीं मिला है।
क्या कहते है प्राइवेट संचालक
प्राइवेट संचालकों का कहना है कि इस स्कीम में ट्रीटमेंट के पैकेज पहले से ही कम है। हम लोग फिर भी लाभार्थियों का इलाज
कर रहे है। क्लेम लगाने पर बार बार क्वायरी की जाती है। इससे बाद भी क्लेम नहीं मिलता। काफी हॉस्पिटलों से तीन माह से
क्लेम ही रिलीज हुआ। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग से बात की गई। उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया है।
इनसेट
-जिले में 95 हजार लोगों को मिलना है आयुष्मान योजना का लाभ
-आठ प्राइवेट अस्पताल व नर्सिंग होम में आयुष्मान भारत स्कीम
-9 सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएससी में भारत स्कीम से इलाज की सुविधा
-95 हजार को मिलना है।
-365 लाभार्थियों को मिल सका है अभी तक इलाज
-185 लाभार्थियों के इलाज का क्लेम लटका
इनसेट
क्या कहते है जिम्मेदार
डिप्टी सीएमओ डॉ वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि मंडल में आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों को इलाज देने कानपुर के बाद
इटावा जिले का नम्बर आया है। हम इस योजना की रफ्तार बढ़ाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। प्राइवेट अस्पतालों
पर जोर दिया जा रहा है कि मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत लाभ दिया जाये। वहां पर मरीजों की संख्या बढने का
अनुमान है।
इनसेट
प्राइवेट अस्पताल से मना होने पर
फोटो नम्बर 07
मिथलेश कुमारी
शिकोहाबाद की मिथलेश का मायका इटावा में है। उनके पित्त की थैली में पथरी थी। इसको प्राइवेट अस्पताल ने भर्ती नहीं
किया। इस पर वह सरकारी अस्पताल पहुंचीं, जहां उनका आयुष्मान योजना के तहत इलाज किया गया।
फोटो नम्बर 08
राजेंद्र सिंह
सराय मानपुर के राजेंद्र सिंह सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उनके नजदीक प्राइवेट हॉस्पिटल में गए। जहां पर कार्ड दिखाने
पर आयुष्मान योजना का लाभ नहीं दिया। इसके बाद चिकित्सकों ने सरकारी अस्पताल में भेज दिया। जहां पर उनका इलाज हो
सका।
फोटो नम्बर 09
प्रकाश चंद
शिकोहाबाद के प्रकाश चंद भी रिश्तेदारी में आए थे, इसके कूल्हे की हड्डी में दिक्कत थी। विशेषज्ञ को दिखाया, कार्ड भी
दिखा था लेकिन आयुष्मान योजना में पाबंद होने के बाद भी चिकित्सक ने अस्पताल में भर्ती नहीं किया। तब जाकर सरकारी
जिला अस्पताल के आयुष्मान वार्ड में भर्ती हुए तब जाकर हुआ इलाज।
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