एटा। मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी में आईसीयू (सघन चिकित्सा इकाई) का निर्माण होना है,1 लेकिन जेई के इंतजार में अब तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। होली से पहले अलीगढ़ में बैठक हुई। इसमें सीएमएस ने मुद्दे को उठाया। उच्चाधिकारियों ने 31 मार्च के बाद जेई को भेजने की बात कही है।
मेडिकल कॉलेज संचालित हुए लगभग तीन वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां आईसीयू नहीं बना है। जिसमें भर्ती कर गंभीर रोगियों का उपचार किया जा सके। ऐसा नहीं है कि यहां वेंटीलेटर आदि की व्यवस्था न हो। सभी संसाधन होने के बाद यहां आईसीयू का निर्माण नहीं हो पाया है।
वार्ड का निर्माण न होने से इमरजेंसी में पहुंचने वाले दुर्घटना में घायल तथा अन्य गंभीर मरीजों को उपचार के लिए आगरा, अलीगढ़ या फिर सैफई भेज दिया जाता है। जिनकी कभी-कभी वहां पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है।
कॉलेज की इमरजेंसी में आईसीयू बनाने की बात बीते एक वर्ष से की जा रही है, लेकिन अभी तक यहां वार्ड नहीं बन पाया है। होली से पहले अलीगढ़ में उच्चाधिकारियों की बैठक में सीएमएस डॉ. सुरेश चंद्रा गए। वहां यह मुद्दा उठाया।
सीएमएस ने बताया कि जेई को भेजा जाए जिससे वार्ड बनने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। इस पर 31 मार्च के बाद जेई को भेजने की बात कही गई। सीएमएस ने बताया कि इमरजेंसी में आईसीयू वार्ड उनकी प्राथमिकता में है।
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लखनऊ से आई टीम ने भी दिया था जोर
मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी की सेवाओं को देखने के लिए करीब 4 माह पूर्व लखनऊ से टीम आई थी। टीम को आईसीयू नहीं मिला था। इस पर 10 बेड का वार्ड बनाने के निर्देश टीम के सदस्यों ने दिए थे।