एटा। महज परचून की दुकान चलाने वाले एक व्यक्ति ने वो कर दिखाया है, जिसे आज भी सभ्य समाज में बहुत अधिक मान्यता नहीं मिल सकी है। अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद उनका संकल्प और इच्छा पूरी करते हुए नेत्रदान किए हैं। उनके नेत्रों से अब किसी और को यह दुनिया देखने का मौका मिलेगा और उसकी जिंदगी रोशन हो सकेगी।
शहर की विजय नगर कॉलोनी निवासी उर्मिला देवी (78) की इच्छा था कि उनकी आंखें मृत्यु के बाद भी किसी के काम आ सकें। उन्होंने नेत्रदान का संकल्प लिया था। इस संकल्प को उनके पति हरिशंकर वार्ष्णेय ने पूरा किया। वह परचून (किराना) की दुकान चलाते हैं। हरिशंकर वार्ष्णेय ने बताया कि 21 अगस्त को अचानक से उर्मिला देवी की तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद हम लोग उनको लेकर अलीगढ़ के एक निजी चिकित्सक के पास पहुंचे। जहां उपचार के दौरान रात लगभग 1 बजे उनका देहांत हो गया।
जिसके बाद देहदान कर्तव्य संस्था को फोन के माध्यम से सूचित किया गया। सूचना मिलते ही वृंदावन से डॉ. श्राफ आई केयर सेंटर के डॉ. रोशन सिंह तथा डॉ. एसके गौड वहां पहुंचे। जिसके बाद परिजन की सहमति से उर्मिला देवी के नेत्र दान की प्रक्रिया को पूरा किया। डॉ. एसके गौड़ ने कहा कि परिवार ने जिस प्रकार से नेत्रदान कराया है, वो एक साहसिक कदम है। मानवता के लिए प्रेरणादायक व सकारात्मक सोच वाले इस कार्य से और भी लोगों को प्रेरणा मिलेगी। भुवनेश, डॉ. विश्वामित्र आर्य, अजय, प्रदीप, पंकज व अन्य लोग मौजूद रहे।
पूरा किया संकल्प
पत्नी उर्मिला को समाज के लिए कुछ न कुछ करने की चाहत हमेशा ही रहती थी। इसीलिए उन्होंने जीवन रहते ही नेत्रदान करने का संकल्प ले लिया था। इसे पूर्ण करके हमने उनकी आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है। - हरिशंकर वार्ष्णेय
ऐसे विरले लोग ही होते हैं, जो संसार से विदा लेने के बाद भी समाज के लिए कुछ न कुछ ऐसा कर जाते हैं। जो लोगों के लिए प्रेरणा बन जाता है। सभी लोगों को आगे बढ़कर ऐसे कार्य करने चाहिए। - उमेश पुंढीर, सेवानिवृत्त कैप्टन थलसेना