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Etah News: रैन बसेरा का नहीं खुला ताला, ठंड में ठिठुर रहे तीमारदार

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वार्ड में मरीज के संग बिस्तर में बैठे तीमारदार। संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में मरीजों संग आने वाले तीमारदार सर्दी में ठिठुरने को मजबूर हैं। उनके ठहरने के लिए बनाए गए रैन बसेरा का ताला ही नहीं खुला है। कभी मरीजों के बेड खाली मिल जाएं तो उन पर लेटने को मिल जाता है, लेकिन बेड खाली न होने की स्थिति में जमीन पर लेटकर तीमारदारों को रात काटनी पड़ रही है। यहां तक कि बिस्तर भी साथ लाने पड़ रहे हैं। रैन बसेरा निर्माण के बाद से अभी तक संचालित नहीं हो पाया है। महिला और पुरुष तीमारदारों के अलग-अलग ठहरने के लिए वर्ष 2015-16 में यह रैन बसेरा मंजूर हुआ। करीब 16 लाख रुपये की लागत से प्राइवेट वार्ड के सामने दो मंजिला भवन में इसका निर्माण कराया गया है।
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गांव कल्याणपुर निवासी पिंकी के बहनोई विकास चार दिन पहले एक एक्सीडेंट में घायल हुए। तबसे मेडिकल कॉलेज के सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। देखभाल के लिए पिंकी उनके साथ रुके हैं। बताया कि दो दिन मरीज कम थे तो बेड पर लेट गए। जबकि दो रात जमीन पर सोना पड़ा। घर से अपने बिस्तर लाए हैं।
जैथरा निवासी चंद्रभान का हार्निया का ऑपरेशन हुआ है। छह दिन से वह भी सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। देखभाल पत्नी कर रहीं हैं, जो पांच साल के बच्चे को भी साथ ले आई हैं। बताया कि कर्मचारियों से तीमारदारों के लिए व्यवस्था के बारे में पूछा, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। जमीन या ब्रैंच पर लेटकर रात काट लेते हैं।
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रैन बसेरा में मिल सकती हैं सभी सुविधाएं
परिसर में जो रैन बसेरा बनाया गया है, उसमें ठहरने के लिए बेड, बिस्तर तो मिलेंगे ही। साथ ही वहां शौचालय, स्नानगृह आदि की भी व्यवस्था का प्रावधान है। यह संचालित हो, तो तीमारदारों को काफी सहूलियत मिलेगी। वर्तमान में रात में सोने के अलावा तीमारदारों के लिए शौचालय और स्नान की बड़ी समस्या रहती है।
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