अलीगंज कस्बा में भूसा बिक्री के लिए खड़ा टैक्टर। संवाद
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एटा। जिले में गेहूं की कटाई के बाद हर साल बड़े पैमाने पर भूसे की बिक्री होती है लेकिन इस सीजन हालात पूरी तरह बदल गए हैं। गेहूं का भूसा इस समय 900 रुपये से 1000 प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। पिछले साल यही कीमत करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल थी। अचानक दोगुनी से अधिक कीमत ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में गेहूं की बुवाई बड़े पैमाने पर होती है। इस बार कटाई के ठीक समय मौसम ने अचानक बदल गया। आंधी, तूफान और बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। मौसम साफ होते ही किसानों ने नुकसान से बचने के लिए थ्रेसर के बजाय हार्वेस्टर से कटाई कराई। हार्वेस्टर की कटाई में बड़ा हिस्सा खेत में ही अवशेष के रूप में रह जाता है। आमतौर पर थ्रेसर से कटाई में किसान अच्छी मात्रा में भूसा सुरक्षित कर लेते थे लेकिन इस बार भूसा उत्पादन में भारी कमी आ गई। यही वजह है कि बाजार में भूसा कम पहुंचा और भाव आसमान छूने लगे। पशुपालक राजबहादुर ने बताया की भूसा कम होने की वजह से भाव बढ़ गए हैं। अभी 900-1000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। आने वाले दिनों में और बढ़ने की आशंका है इसलिए थोड़ा स्टॉक कर लिया है। डेयरी संचालक गीतम सिंह ने बताया कि भूसे की किल्लत ने डेयरी संचालन की लागत भी बढ़ा दी है। मवेशियों का दाना और चारा दोनों महंगे हैं ऊपर से भूसा महंगा होने से उनका बजट बिगड़ गया है। दाउदगंज के पशुपालक नेत्रपाल का कहना है कि इस सीजन पहली बार भूसा 900-1000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। अगले कुछ माह बाद इसके 1200 रुपये प्रति क्विंटल के पार जाने की पूरी संभावना है। एक अन्य पशुपालक अरविंद कुमार यादव का कहना है कि भूसा उत्पादन कम होने, मांग अधिक व स्टॉक सीमित रहने के चलते माना जा रहा है कि भूसे के दाम कुछ समय तक ऐसे ही रहेंगे तो इससे मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।