उत्तर प्रदेश के एटा में गैंगस्टर के मामले में एक युवक करीब 4 साल से जिला कारागार में निरुद्ध है। करीब दो माह पहले उसे बुखार आया, उपचार के बाद भी बंदी ठीक नहीं हुआ। इसके चलते उसे जांच के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां चिकित्सकों ने उसकी एचआईवी जांच भी लिख दी। 24 जुलाई को यह जांच हुई। जिसमें बंदी एचआईवी पॉजिटिव बताया गया। जिला कारागार यह रिपोर्ट भेज दी गई। जिसके बाद एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर से उसका उपचार शुरू करा दिया गया। लेकिन बंदी को इस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं था। उसने जेल अधिकारियों को पूरे विश्वास के साथ बताया कि एचआईवी के जो कारण हैं, वह उनसे दूर रहा है। ऐसे में उसे संक्रमण नहीं हो सकता।
बंदी का विश्वास देखते हुए जेल प्रशासन ने उसकी दुबारा जांच कराने की संस्तुति की। दूसरी जांच 12 सितंबर को हुई, तो बंदी की रिपोर्ट निगेटिव आई। यहीं से स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। बंदी के भाई ने बताया कि एचआईवी की जो दवाएं भाई को खिलाई जा रही हैं, उन्हें खाकर उसकी तबीयत और बिगड़ गई है। उधर, यह विरोधाभासी जांच आने के बाद जेल प्रशासन ने सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा है। जिसके बाद स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। बंदी की फिर जांच कराए जाने की तैयारी है।
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जेल अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि बंदी करीब चार साल से यहां निरुद्ध है। मेडिकल कॉलेज में हुई जांच के बाद उसे एचआईवी पॉजिटिव बताया गया था। बंदी के अनुरोध पर उसकी दोबारा जांच कराई गई। जिसमें अब निगेटिव बताया गया है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा है।
वहीं एचआईवी के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि बंदी की दो तरह की जांचें आई हैं, जिस पर समीक्षा की जा रही है। पुष्टि के लिए बंदी का एक एडवांस टेस्ट कराया जाएगा। जिसके बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।