शहर में निकाली गई सामग्री यात्रा में शामिल श्रावक-श्राविकाएं।
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एटा। पर्यूषण पर्व के छठवें दिन धूपदशमी के अवसर पर ठंडी सड़क स्थित नेमिनाथ जिनालय से सामग्री यात्रा निकाली गई। शहर के विभिन्न मंदिरों में होते हुए बड़े जैन मंदिर पर संपन्न की गई। यात्रा के दौरान श्रावक-श्राविकाएं बैंडबाजों द्वारा जैन भजनों पर भक्तिमय नृत्य करते हुए नजर आए।
पुरानी बस्ती स्थित बड़े जैन मंदिर में जिनधर्म प्रभाविका आर्यिका विद्यांतश्री माताजी ने संयम धर्म के बारे में बताया कि जिनेंद्र भगवान ने संयम के दो भेद किए है। इंद्रीय संयम और प्राणी संयम। जब तक जीवन में संयम नहीं होता, धर्म का पालन नहीं हो सकता। संयम धर्म के द्वारा साधक अनियंत्रित इंद्रिय और मन पर नियंत्रण रखता है।
दोपहर में श्रावक-श्राविकाओं ने जिनालयों की वंदना कर मंदिरों में धूप चढ़ाई। शाम को श्रावक प्रतिकरण, आचार्य वंदना जिनेंद्र भगवान की आरती के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विपिन जैन स्वामी, नितिन जैन नूतन, अंशुल जैन, आलोक जैन, चेतन जैन, मनोज जैन, राजू जैन, अमरचंद्र जैन मौजूद रहे।