एटा। हर नागरिक का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटली सुरक्षित किया जा सके, इसके लिए लोगों की (आभा) आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट बनाए जा रहे हैं। लेकिन एक साल में इसकी स्थिति बेहद खराब रही है। जिले में करीब 22 लाख लोग आईडी के लिए लक्षित किए गए हैं। लेकिन एक साल में महज 5.36 लाख लोगों की ही आईडी बन सकी है।
किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य रिकार्ड सुरक्षित रखने के लिए वर्ष 2023 में आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट की शुरूआत हुई थी। जिले में 22 लाख लोगों का अकाउंट बनना है। अकाउंट के माध्यम से किसी भी व्यक्ति की मेडिकल रिपोर्ट, दवाओं की पर्चियां, ब्लड ग्रुप की जानकारी, डॉक्टर की जानकारी व उपचार आदि जानकारियां ऑन लाइन उपलब्ध होंगे। आभा आईडी बनने के बाद इलाज की फाइलें साथ लेकर नहीं चलनी पड़ेंगी और पुराना रिकॉर्ड देखकर डॉक्टर बेहतर इलाज मुहैया करा सकेंगे। इसका फायदा एक क्लिक पर ही मरीज का सारा रिकार्ड सामने होगा।
कई बार अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में स्वास्थ्य रिकॉर्ड साथ न होने पर डॉक्टर शरीर में दवाओं के प्रभाव को समझ नहीं पाते, इससे इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है। इससे मुक्ति मिल जाएगी। 14 अंकों वाली इस स्वास्थ्य आईडी को मोबाइल पर एप के माध्यम सेे कहीं भी एक्टिव किया जा सकता है। जिले में एम वर्ष से अधिक समय में अब तक कुल 536594 की आईडी बन पाई है। अभी तक इसके प्रति स्वास्थ्य कर्मी लापरवाही बरत रहे थे। 10 अप्रैल से शुरू हुए दस्तक अभियान में प्रत्येक आशा को लक्ष्य दिया गया कि एक दिन में 50 व्यक्तियों की आभा आईडी बनानी है। तब जाकर आईडी बनने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी और 15 दिनाें में 71384 लोगों की आईडी बनाई गई।
खुद भी बना सकते हैं आईडी
सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति खुद की आभा आईडी बना सकता है। आईडी बनवाने के लिए आभा एप को डाउनलोड कर सकते हैं या फिर आप इसकी आधिकारिक वेबसाइट पर भी जा सकते हैं। आधार कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए इससे जुड़ सकते हैं। ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद एक आईडी व पासवर्ड मिल जाएगा।