एटा। देश के एक बड़े मुद्दे पर इन दिनों चर्चा जोर पकड़ गई है। यूं तो पहले भी एक देश एक चुनाव की बातें होती रहीं हैं, लेकिन इस बार सरकार इसे लेकर काफी गंभीरता और तेजी के साथ आगे बढ़ रही है। हालांकि सत्ता पक्ष सहित विरोधी पार्टी के प्रतिनिधि भी इसे इच्छा बता रहे हैं, लेकिन आशंका भी जता रहे हैं कि कहीं न कहीं संविधान से छेड़छाड़ हो सकती है। साथ ही उनका कहना है कि कहीं इसमें सत्ताधारी दल की ही मनमानी न हो जाए, सर्वसहमति से इसको लागू किया जाना चाहिए। जबकि भाजपा का कहना है कि कानून का मसौदा तैयार करने के लिए सभी दलों को समिति में शामिल किया गया है।
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क्या बोले जिलाध्यक्ष
एक देश एक चुनाव बहुत ही अच्छा विचार है। बार-बार चुनाव होने से देश और जनता का काफी पैसा और समय खर्च होता है, जिसे बचाया जा सकेगा। - संदीप जैन, जिलाध्यक्ष, भाजपा
राजनीतिक फायदे के लिए चुनावी बातें की जा रहीं हैं। इस तरह का प्रावधान संभव नहीं है। इसे लागू करना है तो संविधान में भी संशोधन करना होगा। - परवेज जुबैरी, जिलाध्यक्ष, सपा
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भाजपा अपने मतलब के लिए यह बात कर रही है। इस पार्टी की सोच हमेशा से ही संविधान बदलने की रही है। व्यवस्था सर्वसहमति से लागू हो तो अच्छी है। - सूर्यप्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष बसपा
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कांग्रेस पहले से ही इसके लिए प्रयास करती रही है। देश को फायदा होगा, लेकिन भाजपा की मंशा इसकी आड़ में सत्ता पर काबिज रहने की है। - अनिल सोलंकी, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष, कांग्रेस