जैथरा। क्षेत्र के गांव जरारी को ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) घोषित कर दिया गया। यहां लोगों के घरों में इज्जत घर (शौचालय) नहीं बने हैं। यहां तक कि सामुदायिक या सार्वजनिक शौचालय भी नहीं हैं। सबसे अधिक परेशान वृद्ध और दिव्यांग महिलाएं हैं, जिन्हें लंबी दूरी तय कर खेतों में खुले में शौच को जाना पड़ रहा है।अमर उजाला टीम ने बृहस्पतिवार को गांव जरारी में स्वच्छ भारत मिशन की पड़ताल की। पाया कि 200 परिवारों का इस गांव में लगभग 1000 की आबादी है। अभी तक दो-तीन ही घरों में व्यक्तिगत शौचालय बने हैं। गांव के तमाम जरूरतमंद लोगों ने इज्जत घर बनवाने के लिए प्रयास किए, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
इन्हें सरकार की ओर से दी जाने वाली धनराशि नहीं मिल सकी। गांव के धर्मवीर ने बताया कि घर में पत्नी एवं भाई जयवीर दिव्यांग हैं। मेरे घर में अब तक शौचालय नहीं बना है। न ही सरकारी योजना का लाभ मिल सका है। कई बार प्रधान, सचिव से लेकर ब्लॉक और जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए। लेकिन कुछ नहीं हो सका।
मेरे गांव की स्थिति खराब है। शौचालय न होने के कारण गांव की वृद्ध व महिलाओं को खेतों में शौच के लिए जाना पड़ता है।
- जगदीश चंद्र
मेरे घर शौचालय नहीं है। उम्र 70 साल है एवं शारीरिक रूप से दिव्यांग हूं। शौच के लिए रोजाना खेतों में जाने की मजबूरी रहती है।
- भगवान देवी
मैं बैसाखी के सहारे चलती हूं। कई बार ब्लॉक कार्यालय गई, लेकिन शौचालय नहीं मिला। बार-बार वहां जाने में परेशानी होती है।
सुशीला देवी
मेरे घर शौचालय नहीं है, मैं पैरोें से चलने में अक्षम हूं, शौच के लिए खेतों में जाना मेरी मजबूरी है। अफसरों को ध्यान देना चाहिए।
-नेकसी देवी
इस तरह का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। गांव में सर्वे कराऊंगा, अगर शौचालय नहीं बने हैं, तो बनवाए जाएंगे।
-फैसल आलम, खंड विकास अधिकारी जैथरा