एटा। किसान और पशुपालकों को करीब 1800 गोवंश दिए गए थे, इनमें से 600 से अधिक की एक वर्ष में मौत हो चुकी है। गोवंशों का संरक्षण सहभागिता के आधार कराया जा रहा था और सरकार की ओर से 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भोजन आदि के लिए दिए जा रहे हैं। पशु विभाग के सत्यापन में गोवंश मृत पाए गए, इसके बाद 1200 के करीब गोवंशों का भुगतान किया गया है।
निराश्रित गोवंशों की बेहतर परवरिश कराने के लिए सरकार की ओर से सहभागिता के आधार पर संरक्षण में लेकर पालन करने के लिए 30 रुपये प्रति गोवंश हर रोज दिए जा रहे हैं। जिला के 1884 गोवंशों को वर्ष 2021 में दिया गया। जनवरी 2022 में धनराशि आई तो पशुधन विभाग ने क्षेत्रीय पंचायत सचिव और पशुधन प्रसार अधिकारी से सर्वे कराया। टीम द्वारा किए गए सर्वे में खुलासा हुआ कि 674 गोवंश एक वर्ष में मर चुके हैं। संरक्षण के तहत पालन करने वाले किसान और पशुपालकों की ओर से कोई संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया गया।
1210 गोवंशों का 1.30 करोड़ किया भुगतान
जिला में संरक्षण पाने वाले 1884 गोवंशों में से 674 के मर जाने के बाद 1210 का भुगतान किया गया है। 900 रुपये प्रति माह के हिसाब से भुगतान करीब 1.30 करोड़ से अधिक किया गया। इतनी बड़ी संख्या में गोवंशों के मरने से तमाम सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
चार गोवंश देने का है प्राविधान निराश्रित गोवंशों को पशुपालक अथवा किसान संरक्षण के लिए लेेेता है तो उसको चार ही दिए जाने का प्राविधान है। गोशालाओं में से भी पशुपालक गोवंशों को ले सकते हैं, पालन करने के लिए 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से खर्चा दिया जाता है।
27 गोशालाएं फिर भी भटक रहे हैं गोवंश
जिला में निराश्रित गोवंशों का संरक्षण करने के लिए 27 गोशालाएं संचालित हो रही हैं। इसके बाद भी गोवंश भटक रहे हैं। इनमें तीन वृहद, 14 अस्थाई, चार कान्हा आश्रय स्थल और छह निजी शामिल हैं। इन गोशालाओं में 4139 गोवंशों को संरिक्षत किया गया है।
सहभागिता के आधार पर संरक्षित 1884 गोवंशों का भुगतान कराने के लिए सर्वे कराया गया तो 1210 ही मिले हैं, इनका भुगतान 1.30 करोड़ के करीब जनवरी 2022 से जनवरी 2023 तक कर दिया गया है। शेष गोवंशों को मृत बताया गया है। इसकी जांच कराई जा रही है।