एटा। होलाष्टक सोमवार से लग चुका है। ज्योतिषियों के अनुसार अब 7 मार्च तक हिंदू मान्यता के तहत शुभ कार्य नहीं किए जाने चाहिए, लेकिन 1 मार्च को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह आयोजन कराया जा रहा है। इसमें 100 से अधिक जोड़ों का विवाह वैदिक रीति-रिवाज से कराया जाना है। जबकि होलाष्टक के दौरान 16 संस्कार तक वर्जित माने जाते हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रशासन अपने इंतजामों के साथ गरीब परिवारों के वर-कन्या का विवाह कराता है। एक जोड़े के लिए 51 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। इसमें से छह हजार रुपये आयोजन के लिए निर्धारित हैं। इसके तहत ही प्रशासन हिंदू जोड़ों का विवाह वैदिक रीति-रिवाज के साथ करता है। इसमें नियमानुसार यज्ञ के साथ फेरे, कन्यादान आदि रस्में कराई जाती हैं।
1 मार्च को इस तरह का आयोजन शहर के राजकीय इंटर कॉलेज में रखा गया है। इसमें 100 से अधिक जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य है, लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार 27 फरवरी से ही होलाष्टक लग गया है, जो 7 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद ही शुभ कार्य किए जा सकते हैं। जबकि इस दरम्यान ही सरकारी आयोजन कराए जाने को लेकर लोग असमंजस जता रहे हैं।