एटा। सरकारी रिकाॅर्ड में जमीन का मालिक दूसरा, परंतु बिजली चोरी के मामले में महात्मा को फंसा देने का मामला अदालत में दिखाई दिया। जिसमें हाईकोर्ट से प्राप्त जमानत आदेश दाखिल किया गया।
सदर तहसील के गांव अहमदपुर नगला धनु परगना एटा सकीट के जिस खसरा संख्या-181 रकवा 0.74 पर ट्यूबवैल का कनेक्शन लिया जाना अदालत में बिजली विभाग और पुलिस के जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया। उस खसरा के स्वामी नगला परसी निवासी दानवीर सिंह नहीं है। उक्त खसरा के मालिक तो 2010 से पहले से ही उनके ही गांव के निरंजन व विजेंद्र सिंह पुत्रगण महावीर सिंह व रजनीश पुत्र अतर सिंह निवासी नगला परसी चले आ रहे हैं। इसके बावजूद दूसरे की जमीन पर नलकूप कनेक्शन को कटिया डालकर चलाने की झूठी रिपोर्ट 17 नवंबर 2015 को महात्मा दानवीर सिंह के खिलाफ रिजोर थाने में दर्ज करा दी। अदालत में इस तथ्य को उनके अधिवक्ता द्वारा उजागर किया गया। सोमवार को हाईकोर्ट के जमानत आदेश को पत्रावली पर दाखिल किया गया। जिस पर विशेष न्यायाधीश आवश्यक वस्तु अधिनियम अली रजा ने पचास हजार की जमानत पर उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया।
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दी एफआईआर की तहरीर
इस मामले में महात्मा दानवीर सिंह के बेटे अनिल यादव ने बिजली विभाग के 33/11 केवी उपकेंद्र रिजोर के प्रभारी अवर अभियंता श्री अफसर खां , उपखंड अधिकारी वी के सिंह, संविदा कर्मी लाइनमैन कृष्ण मुरारी व महावीर सिंह, विवेचना अधिकारी रहे एचसीपी / असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर मोहनलाल के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र करने की तहरीर रिजोर थाने में दी है।