लहरा गंगा घाट पर गंगा में इस समय काफी कम जल है जो कांवड़ियों को अखर रहा है। जल की कमी के चलते श्रद्धालुओं को नहाने में भी दिक्कतें होती हैं।
गंगा का लहरा घाट काफी प्रसिद्ध है। कांवड़ मेले में देश के कोने कोने से आने वाले शिवभक्त कांपड़िये इसी घाट से गंगाजल भरकर ले जाते हैं और भोले शंकर पर शिवरात्रि के दिन इसे चढ़ाकर अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं। दूर दराज से आने वाले ये श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने के आस लेकर आते हैं, लेकिन उनकी यह आस इस समय पूरी नहीं हो पा रही। इस समय गंगा जिस स्थान पर बह रही है वह लहरा में काफी दूर जाकर है। धार काफी सिमटी हुई है। गंगा में इस समय काफी कम जल है। घाट पर पहुंचते ही जब वे गंगा में जल की कमी देखते हैं तो वे आहत होते हैं। इस समय एक घाट से दूसरे घाट को भी आसानी से पार किया जा सकता है। राजस्थान के धौलपुर के धीरज कहना है कि लहरा घाट पर इस समय जल काफी कम है। मुश्किल से एक फुट पानी होगा। जिससे वे डुबकी लगाने से वंचित रह गए। राजस्थान के ही सतीश ने कहा कि इतने बड़े पर्व को देखते हुए गंगा में ऊपर से पानी छोड़ने की व्यवस्था होनी चाहिए थी।