समूह की महिलाओं की ओर से तैयार किए गए बाजरा के लड्डू।
- फोटो : समूह की महिलाओं की ओर से तैयार किए गए बाजरा के लड्डू।
एटा। ब्लॉक सकीट क्षेत्र में मोटे अनाज से उत्पाद तैयार करके लोगों को स्वस्थ रहने का संदेश दिया जा रहा है। खासतौर से यहां के लड्डू प्रसिद्ध हो रहे हैं। बेहतर आमदनी के साथ ही किसान ने प्रसिद्धि भी हासिल की है।
गांव निवासी शिवा कुमारी राजपूत ने परास्नातक तक पढ़ाई की, लेकिन सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। ससुर दुर्वीन सिंह जैविक खेती करते हैं और मोटे अनाज के अन्य उत्पाद तैयार करके बाजार में उपलब्ध कराते हैं। इनसे प्रेरणा मिली तो शिवा ने 3 वर्ष पहले गौरी महिला स्वयं सहायता समूह का गठन ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत किया। बाजरा के लड्डू बनाकर लोगों को स्वस्थ रखने का संदेश देने और खुद की आय बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करने लगीं। बताया कि देसी घी का प्रयोग कर लड्डू बनाए जाते हैं, इनकी बाजार में अच्छी मांग है। इसमें समूह की सभी महिलाओं को आमदनी का हिस्सा दिया जाता है।
एनआरएलएम के सहयोग से मिली मंजिल
शिवा कुमारी का कहना है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) का विशेष सहयोग मिला है, इसकी वजह से मंजिल मिल गई है। विभाग की मदद से ही समूह का गठन किया गया। वहीं ब्लॉक मिशन मैनेजर बीना शर्मा का कहना है कि समूूह बनवाने के बाद पूरा सहयोग किया गया। इसकी वजह से आज समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है। समूह अच्छा कार्य कर रहा है और लड्डुओं की वजह से उन्हें व जिले को प्रसिद्धि मिली है।
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अन्य प्रदेशों में लगाए जाने वाले स्टॉल पर रहती है मांग
शिवा के ससुर दुर्वीन सिंह राजपूत का कहना है कि बाजरा के लड्डुओं के स्टॉल अन्य प्रदेशों में भी कृषि मेला, प्रदर्शनी आदि में लगाए जाते हैं। यहां काफी पसंद किए जाते हैं और मांग भी रहती है। इसकी वजह से अच्छा काम चल रहा है। मोटा अनाज दिवस पर होने वाले तमाम कार्यक्रमों से भी पहचान मिली है। कई प्रदेशों में बाजरा के लड्डुओं की सराहना और मांग की जा रही है।