एटा। तहसील क्षेत्र जलेसर के लोग लंबे समय से खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। तमाम संघर्ष किए, सरकारी प्रयास भी किए गए। लेकिन समस्या से निजात नहीं मिल सकी है। अब तक स्थाई समाधान न होने से लोगों को लंबी दूरी तय कर शुद्ध पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। यह लोगों की जिंदगी और दिनचर्या से जुड़ा अहम मुद्दा है जो हर चुनाव आते ही जिंदा हो जाता है।यह ऐसा क्षेत्र है, जहां सबसे ज्यादा क्षेत्र में खारा पानी है। 40 से अधिक ग्राम पंचायतों को चिह्नित किया गया। इन ग्राम पंचायतों में 150 से अधिक गांव खारे पानी से प्रभावित हैं। लोग निजी स्रोतों से समस्या का समाधान नहीं कर पाए और सरकारों की ओर से कुछ किया नहीं गया। यहां से कई बार विभिन्न दलों के नेता केंद्र व राज्य सरकारों में मंत्री रहे हैं। लेकिन लोगों से सीधी जुड़ी समस्या का समाधान कराने में नाकाम साबित हुए। खारे पानी की गंभीर समस्या होने के चलते महिलाएं और पुरुष लंबी दूरियां तय करने के बाद शुद्ध जल लेकर आते हैं।
खारे पानी की समस्या से जूझने रहे प्रमुख गांव
क्षेत्र के गांव महानमई, पवरा, नगला क्यार, नगला मीरा, नगला चाॅद, सिकराऊ, खानपुर, सिरगंवा, कपरई, वारा समसपुर, तखावन, गढ़ी सलूका, भूपालगढ़ी, ओमनगर, महापुर, नगला सुखदेव, कासिमपुर, काजीपुर, बदनपुर आदि में खारा पानी होने की वजह से पेयजल की काफी किल्लत है। सुबह 4 बजे से शाम 7 बजे तक गांव के लोग कई किमी दूर से मीठा पानी लाते हैं।
खारे पानी की गंभीर समस्या है, इसकी वजह से कई पीढि़यों को परेशानी झेलनी पड़ी है। लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है, जो क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा मुददा है। - अतुल कुमार, नगला मीरा
जनप्रतिनिधियों के सामने खारे पानी का मुददा हर चुनाव में उठाया जाता है। लेकिन वादा करने के बाद कोई पूरा कराने नहीं आता। इसकी वजह से आज भी मुद्दा केवल मुद्दा ही बनकर रह गया है। - विक्की गुप्ता, महानमई
जलेसर क्षेत्र में खारे पानी की समस्या है, 40 ग्राम पंचायतें चिह्नित की गई थी। इनमें शुद्ध पानी की जगह बोरिंग करके पाइप लाइन से पानी सप्लाई कराया जाएगा। इसका 150 से अधिक गांव को लाभ होगा। - राजेंद्र सिंह, सहायक अभियंता, जल निगम ग्रामीण क्षेत्र