एटा। हत्या के जिस आरोप में जसरथपुर थाने के गांव कलू निवासी मानसिंह उर्फ नाहर सिंह 12 साल तक जिला कारागार में बंद रहा। उस आरोप को सरकारी पक्ष सही साबित नहीं करा सका। पुलिस ने जिन गवाहों के आधार पर आरोपी का चालान किया, वे ही गवाह पुलिस की कार्रवाई पर ही प्रश्न चिह्न लगा गए। ऐसे में अदालत ने आरोपी को रिहा करने का आदेश जारी किया।
हुआ यह कि नयागांव थाने के कुदा गांव निवासी मंगूलाल का लड़का नीरज कुमार 29 मार्च 1999 को रात 9 बजे शौच को गया लेकिन वापस नहीं लौटा। 2 अप्रैल 1999 को उसका शव नावर गांव निवासी छविनाथ सिंह के खेत में मिला। इस मामले की विवेचना में पुलिस ने गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी मानसिंह उर्फ नाहर सिंह पुत्र सोनपाल उर्फ सोनेलाल को गिरफ्तार करके आरोपपत्र अदालत भेज दिया। 20 जनवरी 2011 से मानसिंह जिला कारागार में निरुद्ध रहा। बारह साल तक चली इस मामले की कार्रवाई में पुलिस द्वारा हत्या के चश्मदीद गवाह बताए गए संतोष सिंह व शिवपाल ने घटना का समर्थन नहीं किया।
वहीं कायम सिंह ने भी पुलिस द्वारा प्रदर्शित अपने बयानों को गलत बताया। ऐसे में पुलिस की जांच पर ही प्रश्न चिह्न लग गया। गवाहों के बयानों व पत्रावली पर मौजूद तथ्यों के अवलोकन के बाद विशेष न्यायाधीश डकैती प्रभावित क्षेत्र वीरभद्र ने पाया कि आरोपी के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो रहे हैं। जिस पर उन्होंने आरोपी को जिला कारागार से रिहा करने का आदेश जारी किया।