एटा। कलेक्ट्रेट में विनियमितीकरण के खेल की जांच राज्य विशेष अनुसंधान दल (एसएसआईटी) द्वारा करीब डेढ़ साल से की जा रही है। 30 कर्मचारियों की विनियमितीकरण में नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारियों ने फर्जी आदेश बनाए और मामला पकड़ में आने पर फाइलों को ही गायब कर दिया था। इनमें से अधिकांश कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जो लोग सेवा में हैं, उनकी धड़कनें एसएसआईटी की कार्रवाई बढ़ गई हैं। जिसमें पत्रावली गायब करने वाले दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
यह गड़बड़ियां 1993 और 1998 में की गई थीं। उस समय 30 सीजनल सहायक वासिल बाकी नवीसों का विनियमितीकरण किया गया। विनियमित न हो सके दो कर्मचारियों ने शिकायतें शुरू कर दीं। सूचना का अधिकार से जानकारी मांगी तो इस प्रक्रिया की फाइल ही नहीं मिली। शिकायतों के बाद 2020 में तत्कालीन डीएम सुखलाल भारती ने इस मामले में शासन को पत्र भेज उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। बाद में शासन से विशेष जांच दल गठित कर अप्रैल 2022 में जांच शुरू करा दी गई। एसआईटी की जांच में गड़बड़ियां सामने आ गईं। जिनके पकड़े जाने के डर से फाइलें गायब की गई थीं। उस दरम्यान कलेक्ट्रेट में तैनात रहे तत्कालीन वरिष्ठ सहायक रमेश चंद्र और रामरूप के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।
उधर, शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों के बीच पूरे दिन इस कार्रवाई की चर्चा रही। जबकि विनियमितीकरण वाले जो कर्मचारी सेवा में हैं, उनको भी कार्रवाई का डर सता रहा है। एडीएम प्रशासन आलोक कुमार ने बताया कि मामले की जांच राज्य के विशेष जांच दल द्वारा की जा रही है। स्थानीय स्तर से जो भी जानकारी और सहयोग मांगा जा रहा है, उपलब्ध कराया जा रहा है। एसआईटी या शासन द्वारा अभी कार्रवाई को लेकर कोई पत्र नहीं भेजा गया है।