एटा। शहर में जीटी रोड किनारे करीब 5 एकड़ जमीन हड़प ली गई। 1980 के दशक में चकबंदी के दौरान अपनी जमीन को गलत रूप से बंजर में दर्ज करने की बात कही थी, लेकिन 1940 के उर्दू में उपलब्ध भूअभिलेखों में भी जमीन बंजर की ही निकली है। इससे भूमाफियाओं का दावा पूरी तरह गलत साबित हो गया है। ऐसे में कार्रवाई का रास्ता और साफ हो गया है।
शीतलपुर ग्राम पंचायत के तहत जीटी रोड पर जवाहर लाल नेहरू डिग्री कॉलेज के सामने यह बेशकीमती जमीन है। जिस पर लंबे अरसे से कानूनी दांवपेच खेले गए। उस समय के अधिकारियों और सियासतदानों ने सांठ-गांठ के जरिये इस जमीन को सरकारी से प्राइवेट करार करा लिया। जमीन सरकारी थी, इसलिए किसी को फर्क नहीं पड़ा और मामला सालों-साल दबा रहा।
इस बीच भूमाफिया पर्दे के पीछे से इसे कॉलोनी का रूप देने लगे। प्लॉटिंग कर करोड़ों रुपये में जमीन बेच डाली। अब आकर शिकायत हुई तो जिलाधिकारी ने दबे हुए 25 साल पुराने मामले को खोल डाला। कानूनी ढंग से कार्रवाई करते हुए 1998 में लोगों के पक्ष में एएसडीएम न्यायालय से जारी आदेश को खारिज करा दिया। साथ ही जमीन की खरीद-फरोख्त, निर्माण आदि पर प्रतिबंध लगवा दिया। उस दावे में वादकारियों आदि का कहना था कि यह जमीन उनकी है, जो चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गलत रूप से सरकारी बंजर में दर्ज हो गई।
इस संबंध में राजस्व अभिलेखागार से 1940 के अभिलेख निकलवाए गए। यहां भी भूमाफिया मात खा गए। अभिलेख में यह जमीन किसी व्यक्ति के नाम नहीं निकली। बंजर में दर्ज है। ऐसे में इन लोगों के आगे की लड़ाई के रास्ते भी लगभग बंद हो चुके हैं।