नेशनल हाईवे जीटी रोड पर सुबह के समय प्रदूषण से छाई धुंध। संवाद
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एटा। इस बार पिछली साल की अपेक्षा दिवाली पर वायु गुणवत्ता में सुधार रहा। दिवाली की अगली सुबह एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 161 पर था लेकिन दूज पर लोगों ने अधिक पटाखे चलाए। साथ ही यात्रियों की भीड़ के चलते वाहनों की आवाजाही भी अधिक रही। इससे हवा प्रदूषित हुई। बृहस्पतिवार सुबह एक्यूआई 186 तो दोपहर के समय 223 तक पहुंच गया। इसके चलते दमा, हृदय के रोगियों को खास दिक्कत का सामना करना पड़ा। आम लोगों को भी आंखों में जलन और खुजली महसूस हुई।
लोगों की समझदारी और पटाखों पर महंगाई के चलते इस दिवाली आतिशबाजी पिछले वर्षों की अपेक्षा कम रही। पिछली साल दिवाली की अगली सुबह घना प्रदूषण रहा था और एक्यूूआई 314 पर पहुंच गया था। इस साल भी दिवाली से पहले एक्यूआई 211 पर आ गया था। ऐसे में आशंका थी कि दिवाली की आतिशबाजी में यह और बढ़ेगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ और दिवाली के अगले दिन स्थिति ठीक रही। वहीं बुधवार को बहनें भाइयों के घर पहुंचीं तो तमाम परिवारों में जमकर आतिशबाजी हुई।
रात के समय हर ओर धुआं नजर आ रहा था। बृहस्पतिवार की सुबह भी आसमान में धुंध की चादर दिखाई दे रही थी। सुबह के समय एक्यूआई 202 हो गया था जो समय के साथ बढ़ता गया। दोपहर के समय जब वाहनों की भीड़भाड़ से सड़कों पर धूल उड़ी तो यह अधिकतम स्तर 223 पर जा पहुंचा।
200 से अधिक एक्यूआई करता है प्रभावित
मेडिकल कॉलेज के परामर्शदाता डॉ. एस. चंद्रा बताते हैं कि एक्यूआई 50 तक सबसे अच्छा माना जाता है। जबकि 100 तक यह सांस रोगियों को प्रभावित करता है। 200 तक पहुंचने पर दमा, फेफड़े और हृदय रोगियों पर अधिक प्रभाव डालता है। जबकि 300 तक होने की स्थिति में सभी लोगों को सांस लेने में समस्या हो सकती है। 300 से ऊपर जाने पर यह लोगों को बीमार बना सकता है।