एटा। जिले में 28 गोशालाएं संचालित हैं। ज्यादातर गोशालाएं संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं। गर्मी शुरू हो गई है लेकिन गोवंशों के लिए छाया तक की व्यवस्थाएं नहीं है, टिनशेड टूटे पड़े हैं। ऐसे में गर्मियों में गोवंशों को सूरज की तपिश झेलनी पड़ेगी और उनके बीमार होने की आशंका रहेगी। गोवंशों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आश्रय स्थल 21 बनाए गए हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में सात संचालित हो रहे हैं। सर्दियों में गोवंशों के ठिठुरने की तमाम शिकायतें मिलती रहीं। अब गर्मियों की तपिश से गोवंशों को जूझना होगा। निजी गोशाला मलावन की बात करें तो यहां पर गोवंशों की अपेक्षा पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। क्षमता से अधिक गोवंशों का संरक्षण किया जा रहा है। यहां पर 300 गोवंशों की क्षमता है जबकि 370 रह रहे हैं। जबकि 400 गोवंशों की क्षमता की वृहद गोशाला वाहिद बीबीपुर में संसाधनों की कमी के चलते सिर्फ 234 गोवंश ही रखे गए हैं। मंडी समिति निधौली कलां में बनाई गई अस्थायी गोशाला के टिनशेड टूट चुके हैं। यहां गोवंशों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ेगी। अधिकारी भी कई बार निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। गोवंशों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
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संयुक्त निदेशक एवं नोडल अधिकारी को मिली भूसे की कमी
संयुक्त निदेशक इटावा एवं नोडल अधिकारी श्रीकृष्ण ने शुक्रवार को ब्लॉक मारहरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नगला ख्याली में बनी गोशाला का निरीक्षण किया। यहां पर भूसे की कमी पाई गई, दान का भूसा भी नहीं पहुंचा। भूसे की व्यवस्थाएं करने के लिए बीडीओ को टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। वहीं ग्राम पंचायत बमनोई में बनी गोशाला की 20 बीघा जमीन खाली पड़ी पाई गई। इसमें हरा चारा बोने के निर्देश दिए।
पड़ोसी ग्राम पंचायतों के सहयोग से सुधरेगी गोवंशों की स्थिति
जिस ग्राम पंचायत में गोशालाएं संचालित हो रहीं हैं, उन गोशालाओं में मौजूद गोवंशों की स्थिति सुधारने में पड़ोसी ग्राम पंचायतों से सहयोग लिया जाएगा। अब तक ऐसा नहीं था, लेकिन अब सहयोग करना अनिवार्य कर दिया गया है। ताकि गोवंशों का बेहतर संरक्षण हो सके।