एटा। धूल, स्मॉग और धुएं से बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बीते चार दिनाें से मेडिकल कॉलेज में खांसी के साथ सांस के रोगियों की संख्या बढ़ी है। इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक मरीजों की लाइन लगी रहती है। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में बदलाव के साथ प्रदूषण के कारण हर आयु वर्ग का व्यक्ति संक्रमण से जूझ रहा है।
जिले में बीते चार दिनों से लगातार स्मॉग छाया हुआ है। सोमवार की सुबह आसमान में स्मॉग था। नौ बजे के करीब धूप निकली। लगभग आधा घंटे बाद स्मॉग फिर हो गया। इसका मुख्य कारण प्रदूषण है। स्थानीय से लेकर बाहरी जिले भी इसके कारण हैं। इसके साथ ही गांव में लोग खेतों में पराली जला रहे हैं। सड़क किनारे ढेरों पर कूड़ा भी जलाया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की मानें तो इस समय ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक सांस के अलावा खांसी से पीड़ित बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के लोग आ रहे हैं। सोमवार को बाल रोग विभाग में 65 बच्चे खांसी के साथ सर्दी संबंधी पहुंचे। जबकि ओपीडी में 85 सांस रोगी पहुंचे। इमरजेंसी में 24 घंटे में 15 व्यक्ति सांस से संबंधित रोगों के पहुंचे।
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डॉक्टर बोले, बचाव बेहद जरूरी
एनसीडी सेल के डॉ. चेतन चौहान कहते हैं कि मास्क लगाकर ही घरों से बाहर निकलें। घरों के बाहर पानी का छिड़काव करें। जिससे धूल न उड़े। मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. माधवेंद्र ने कहा कि प्रदूषण बढ़ने से सांस रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। जब तक प्रदूषण कम न हो, लोगों को मास्क लगाकर ही घरों से निकलना चाहिए।
एक साल के पुत्र अली की दो दिन से सांसें तेज चल रहीं हैं। रात को सांस लेने में परेशानी भी होती है। निमोनिया की आशंका पर चिकित्सक के पास आई हूं। - नरगिस, कांशीराम काॅलोनी मानपुर
तीन महीने की बेटी आयुषी को सांस लेने में परेशानी हो रही है। सांसें तेज-तेज चलने से रात को डर लगने लगा। सोमवार सुबह होते ही चिकित्सक को दिखाने आई हूं। -सुमन, लालपुर
राघवेंद्र