एटा। अभी निकाय चुनाव को लेकर आरक्षण घोषित नहीं किया गया है। राजनीतिक दलों का टिकट वितरण भी इस पर निर्भर है। हालांकि विभिन्न दलों में टिकट मांगने वालों की भीड़ है। जमकर प्रचार किया जा रहा है। यह माना जा रहा है कि एक का नाम घोषित होते ही कुछ दावेदार बागी होकर चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में चुनाव से पहले ही राजनीतिक दलों के सामने बागियों से निपटने की चुनौती होगी।
चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन इसकी सरगर्मियां परवान चढ़ चुकी हैं। राजनीतिक हलकों से लेकर आम लोगों तक की जुबान पर चुनाव की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सभासद और अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वालों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। एक ओर जहां पार्टी कार्यालयों, मुख्यालयों पर टिकट के दावेदारों की दौड़ लगातार चल रही है। तो दूसरी ओर तमाम दावेदारों ने पार्टी के बैनर पर ही चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है।
राजनीतिक दलों की बात करें तो दावेदारों की सबसे लंबी फहरिस्त सत्तारूढ़ भाजपा में ही है। ऐसे में चुनौती भी इसी दल के सामने सबसे ज्यादा है। टिकट न मिलने वाले दावेदारों के बागी या भितरघाती होने की आशंका नेताओं की चिंता की वजह बनी हुई है। इसलिए टिकट पर गहरा मंथन किया जा रहा है। ऐसे नाम को लाने की कोशिश की जा रही है जिस पर सर्वसहमति बन सके। सपा और कांग्रेस के दावेदारों का प्रचार भी सड़कों से लेकर सोशल मीडिया पर नजर आने लगा है।
हालांकि अभी तक बसपा की ओर से चेहरे उजागर नहीं हुए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप जैन ने बताया कि टिकट का निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा। जिसको प्रत्याशी बनाया जाएगा, उसको पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ाया जाएगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष गंगासहाय लोधी कहते हैं कि कई लोगों ने चुनाव लड़ने का दावा किया है। पार्टी जिसके पक्ष में निर्णय देगी, उसे मिलकर चुनाव लड़ाएंगे।