मलावन क्षेत्र में खेतों में जलती पराली ।संवाद
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एटा। जिले में किसानों द्वारा धान काटने के बाद खेत में बची हुई पराली को नष्ट करने के लिए आग लगाई जा रही है। जिसकी वजह से वातावरण दूषित हो रहा है। जबकि कृषि विभाग की ओर से किसानों को न तो जागरूक किया जा रहा और न ही प्रदूषण करने वालों पर कार्रवाई ही की जा रही है।
कृषि विभाग की ओर से जिले में आठ जगहों पर होर्डिंग और 140 जगहों पर वॉल पेंटिंग कराने का फरमान जारी किया गया था। जिससे किसान पराली न जलाने के लिए जागरूक हों, लेकिन जिले में न तो होर्डिंग लगीं और न ही वॉल पेंटिंग कराई गई।
जागरूकता के अभाव में किसान खेत में पड़ी पराली को आग के हवाले कर रहे हैं। वहीं उप कृषि निदेशक कार्यालय से करीब 6300 किसानों को डीकंपोजर वितरित किया गया। जिसका रिकॉर्ड भी विभाग में नहीं है। ऐसे में इसका किसानों तक वितरण किया जाना भी संदेह के घेरे में है।
ढाई हजार से दस हजार रुपये तक जुर्माने का है प्रावधान
उप कृषि निदेशक रोताश सिंह ने बताया कि जिले में अगर कोई किसान पराली जलाता है तो पहली बार पकड़े जाने पर ढाई हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं दूसरी बार पकड़े जाने पर 5 हजार रुपये और तीसरी बार पकड़े जाने पर दस हजार रुपये का जुर्माना वसूलने का प्रावधान है।
किसानों को पराली न जलाने को लेकर जागरूक किया जा रहा है। अगर कोई किसान पराली जलाता है और सैटेलाइट की निगरानी में आता है तो उससे पहली बार में ढाई हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।
- रोताश सिंह, उपकृषि निदेशक