एटा। अलीगंज रोड स्थित कुसाढ़ी में संचालित क्षय रोग अस्पताल में पिछले चार माह से मंटोक्स टेस्ट के लिए आवश्यक ट्यूबरक्यूलिन (पीपीडी) उपलब्ध नहीं है। वैक्सीन की कमी के कारण संभावित क्षय मरीजों की महत्वपूर्ण जांच प्रभावित हो रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों को या तो अन्य जांचों पर निर्भर रहना पड़ रहा है या फिर उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि मेडिकल कॉलेज में भी ट्यूबरक्यूलिन उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।क्षय रोग की पहचान के लिए मंटोक्स टेस्ट एक महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। इस जांच में चिकित्सक मरीज की बांह की त्वचा के ठीक नीचे ट्यूबरक्यूलिन की निर्धारित मात्रा का इंजेक्शन लगाते हैं। इंजेक्शन लगाने के 48 से 72 घंटे बाद मरीज को दोबारा बुलाकर इंजेक्शन वाली जगह की जांच की जाती है। त्वचा पर बनने वाले उभरे हुए लाल निशान या सूजन के आकार को मापकर यह आकलन किया जाता है कि मरीज के शरीर में टीबी संक्रमण की प्रतिक्रिया मौजूद है या नहीं। अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में संभावित टीबी मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं। मंटोक्स टेस्ट उपलब्ध न होने से चिकित्सकों को मरीजों की स्थिति का आकलन करने में कठिनाई हो रही है। वहीं कई मामलों में अन्य जांचों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे जांच प्रक्रिया लंबी होने के साथ मरीजों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि चार माह पहले 260 ट्यूबरकुलिन की आपूर्ति हुई थी। अगर वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया तो इसकी डिमांड भेजी जाएगी।