एटा। रेल विस्तार की उम्मीद लगाए बैठी जनता को एक बार फिर से मायूसी हाथ लगी है। 1 फरवरी को जारी हुए केंद्र सरकार के अंतरिम बजट से लोगों को काफी उम्मीदें थीं। वह सोच रहे थे कि चुनावी वर्ष में एटा और कासगंज के लोगों की इस मांग को पूरा किया जा सकता है। पूर्वोत्तर रेलवे को जारी किए गए बजट में तीन अन्य नई लाइनों के लिए पैसा मिला है। लेकिन एटा-कासगंज लाइन के लिए बजट नहीं दिया गया है। कुल 29 किमी लंबी एटा-कासगंज रेल लाइन को लेकर दोनों जिले के लोग सात दशक से आस लगाए बैठे हैं। एटा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन 1949 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ओर से किया गया था। तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री रोहन लाल चतुर्वेदी के प्रयासों से टूंडला से एटा तक रेल लाइन तो बिछ गई। मगर अभी तक यहां से आगे नहीं बढ़ सकी है। इसकी वजह से एटा विकास और परिवहन के क्षेत्र में काफी पीछे है। केंद्र सरकार ने इस रेल लाइन को 2017-18 के आम बजट में स्वीकृति दी थी। इस कार्य के लिए 276.90 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया। रेल मंत्रालय को यह बजट जारी नहीं किया गया। इसके चलते परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका। इस बार भी एनईआर (पूर्वोत्तर रेलवे) को बजट नहीं दिया गया है।
दो यात्री गाड़ियां ही हो रही हैं संचालित
इस समय एटा रेलवे स्टेशन से मात्र दो गाड़ियां संचालित हो रही हैं। वहीं इनका आने-जाने का समय भी लोगों के अनुकूल नहीं है। इसके चलते लोगों को खास लाभ नहीं मिल पा रहा है। सुबह एक ट्रेन टूंडला से एटा आती है तो एक ट्रेन एटा से आगरा जाती है। जो कि शाम को वापस आती है और फिर टूंडला चली जाती है। इनमें से एटा-आगरा फोर्ट पैसेंजर इस समय बंद चल रही है।
वर्जन-
एनईआर को आवंटित किए गए बजट में तीन नई लाइनों का निर्माण होना है। कासगंज से एटा के बीच रेल लाइन के फिलहाल कोई बजट नहीं मिला है।
पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ