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Etah: बच्चों में बढ़ा हाइपोथर्मिया का खतरा, हर दिन अस्पताल पहुंच रहे पांच-छह बाल रोगी, जानें लक्षण और उपचार

Wed, 11 Jan 2023 11:44 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

बढ़ती सर्दी के बीच बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में उनकी देखभाल करना और अधिक जरूरी हो जाता है। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि नवजात शिशु का शरीर बेहद संवेदनशील होता है, इसलिए उन्हें इससे ज्यादा खतरा होता है। 
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बच्चे का इलाज करते डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एटा जिले में इन दिनों बढ़ती ठंड के साथ-साथ बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है। जुकाम, खांसी, बुखार के साथ ही हाइपोथर्मिया जैसी स्थिति का भी खतरा बना रहता है। मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन पांच-छह बाल रोगी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

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डॉ. वैभव गुप्ता ने बताया कि हाइपोथर्मिया में तेज ठंड की वजह से शरीर और दिमाग जमने लगता है। आम भाषा में हम इसे ठंड लगना कहते हैं। इस बीमारी में रोगी के हाथ-पांव ठंडे पड़ने लगते हैं। यह काम करना बंद कर देते हैं। पेट में असहनीय पीड़ा होने लगती है। हाइपोथर्मिया का खतरा सबसे ज्यादा छोटे बच्चों और बुजुर्गों को होता है। उनका शरीर नीला पड़ने लगता है। कई बार यह जानलेवा भी हो सकता है।

बताया कि खाली पेट हाइपोथर्मिया का खतरा ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि इस समय मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन इस रोग से पीड़ित पांच से छह मरीज आ रहे हैं। इन्हें उपचार दिया जाता है। परामर्श दिया जा रहा है कि सर्दी के मौसम में खुद को बचा कर रखें। अनावश्यक घर से बाहर न निकलें। अगर किसी काम से बाहर जाना पड़ रहा है तो शरीर, सिर को गर्म कपड़ों से ढक कर रखें।

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हाइपोथर्मिया रोग - फोटो : Social Media

कंगारू मदर केयर है हाइपोथर्मिया से नवजात को बचाने में सहायक

सीएमएस डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि नवजात शिशु का शरीर बेहद संवेदनशील होता है। इन्हें बीमारियों से बचाने के लिए ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। कंगारू मदर केयर तकनीक सहायक है। मां शिशु को सीने से चिपकाकर अपने शरीर की गर्माहट से बच्चे के शरीर के तापमान को बनाए रखती है।

ऐसे पहचानें हाइपोथर्मिया के लक्षण

शरीर का तापमान अगर 95 डिग्री से कम हो जाए या शरीर पर्याप्त गर्मी न पैदा कर पाए, तो हाइपोथर्मिया की स्थिति पैदा हो जाती है। इस बीमारी में रोगी की आवाज धीमी हो जाती है या उसे नींद आने लगती है। पूरा शरीर कांपने लगता है। हाथ-पैर जकड़ने लगते हैं। दिमाग शरीर से नियंत्रण खोने लगता है। हृदय गति तेज हो जाती है। मांसपेशियां तापमान का लेवल बनाए रखने के लिए एनर्जी रिलीज करती हैं।

क्या है हाइपोथर्मिया उपचार

चिकित्सकों के अनुसार हाइपोथर्मिया के रोगी को सबसे पहले गर्म कपड़ों से ढककर किसी गर्म कमरे या गर्म जगह पर लिटा दें। ध्यान रहे कि ऐसी स्थिति में सीधे गर्मी देना खतरनाक हो सकता है। इसलिए आग के पास या हीटर के पास मरीज को सीधे न ले जाएं। हाइपोथर्मिया के मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न दें।
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