एटा। मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए रखे गए स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन मिलने में कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। इसे लेकर 50 से अधिक कर्मचारियों ने सोमवार सुबह प्रदर्शन किया। इसके बाद प्रभारी प्राचार्य से मिलकर अपनी समस्याएं बताईं।
मेडिकल कॉलेज में स्टाफ की जरूरत को देखते हुए इन दिनों बड़े स्तर पर भर्तियां की जा रही हैं। भर्तियों की औपचारिकताएं आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कराई जा रही हैं। वहीं से इनके वेतन भुगतान आदि की प्रक्रिया की जाती है। इसे लेकर कर्मचारियों में गतिरोध बना हुआ है।
सोमवार सुबह ऐसी एजेंसियों से भर्ती किए गए कर्मचारी विरोध में उतर आए। 50 से अधिक कर्मचारियों ने काम न कर प्रदर्शन किया। इनमें स्टाफ नर्स, मल्टी पर्पज वर्कर, एलटी, क्लर्क सहित अन्य पैरामेडिकल स्टाफ शामिल रहा। कुछ का कहना था कि चार महीने पहले भर्ती हुई थी। अभी तक एक भी महीने का वेतन नहीं मिला। तो कुछ कर्मचारियों ने मनमाने ढंग से वेतन कटौती किए जाने की समस्या बताई। एकत्रित होकर अपनी समस्या बताने के लिए अस्पताल से एकेडमिक विंग में पहुंचे।
यहां प्रभारी प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल से उनकी वार्ता हुई। कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं बताते हुए इस स्थिति में कार्य करने में असमर्थता जताई। हालांकि उन्हें समझाया गया कि यह शिकायतें नियोक्ता एजेंसी स्तर की हैं और वो ही इसका निस्तारण करेगी। एजेंसी से बात करने का भरोसा दिया। जिसके बाद कर्मचारी वापस अस्पताल लौट आए। हालांकि उन्होंने काम नहीं किया।
चिकित्सा सेवाओं पर नहीं पड़ा असर
मरीजों के लिए यह बहुत बड़ी राहत की बात रही कि कर्मियों के काम न करने के बावजूद चिकित्सा सेवाओं पर असर नहीं पड़ा। दरअसल, सारे कर्मचारियों ने एकसाथ काम ठप नहीं किया। कुछ लोग प्राचार्य से मिलने गए तो कुछ जांच, उपचार आदि व्यवस्थाओं में लगे रहे।
करीब 300 कर्मचारी आउटसोर्सिंग एजेंसी से भर्ती हुए हैं। इनके वेतन आदि की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की है। सोमवार को कई कर्मचारियों ने प्राचार्य से मुलाकात की। उनकी समस्या संबंधी पत्र तैयार कर संबंधित एजेंसी को भेजा जाएगा। कर्मचारी इससे संतुष्ट हैं और मंगलवार से सामान्य रूप से कार्य करेंगे।
- डॉ. विवेक पाराशर, मीडिया प्रभारी मेडिकल कॉलेज