एटा। कस्बा अवागढ़ स्थित एक अपंजीकृत चिकित्सक के इलाज से बालक की जान चली गई। उसकी हालत गंभीर होने पर झोलाछाप ने हाथ खड़े कर लिए। खुद ही एंबुलेंस को फोन करके बुलाया और मेडिकल कॉलेज भेज दिया। रास्ते में बालक की मौत हो गई। परिजन ने एंबुलेंस की हालत खराब होने से धीमे चलने का भी आरोप लगाया है।
ब्लॉक व थाना अवागढ़ क्षेत्र के गांव खटौटा निवासी विजय सिंह के 10 वर्षीय पुत्र आशिक की मौत हुई है। विजय सिंह ने बताया कि बेटे को दो दिन से खांसी और बुखार था। कस्बा अवागढ़ स्थित एक क्लीनिक पर इलाज चला। आरोप है कि सोमवार सुबह करीब नौ बजे इलाज कराने ले गए तो दवाएं दी गईं।
इसके बाद तबीयत बिगड़ती चली गई और क्लीनिक संचालक ने हाथ खड़े कर लिए। एंबुलेंस बुलाकर मेडिकल कॉलेज भेज दिया। आरोप है कि जिस एंबुलेंस से बेटे को मेडिकल कॉलेज लाया गया, वो भी काफी देर से आई और जब चली तो स्थिति ठीक न होने की वजह से धीमी रफ्तार से चलाई गई। जिसकी वजह से इलाज मिलने में देरी होती रही। हालांकि परिजनों ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी प्रभारी डॉ. मधुप कौशल ने बताया कि बच्चा जब अस्पताल लाया गया, तब तक मौत हो चुकी थी। परिजन ने उसे सर्दी, खांसी और बुखार बताया था।