एटा। जिले में तीन निर्माणाधीन परियोजनाएं हैं। ऐसे में प्रदूषण बढ़ गया है। धूल सड़कों पर उड़ रही है। इससे अस्थमा रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। आंकड़ों पर गौर करें तो बीते वर्ष के सापेक्ष इस वर्ष 5300 रोगी अधिक अस्थमा के शिकार हुए हैं। बड़ी संख्या में रोगी मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं।
शहर में सीवर लाइन व मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन है। मलावन में जवाहर तापीय विद्युत परियोजना का निर्माण चल रहा है। वहीं रेलवे लाइन का निर्माण कार्य चल रहा है। इससे उड़ने वाली धूल व सड़कों पर दौड़ रहे धुआं फेंकने वाले वाहनों से जिले में सांस रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है।
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 70 से 75 सांस के रोगी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। वर्ष भर के आंकड़ों पर गौर करें तो बीते वर्ष जिले में स्वास्थ्य इकाइयों पर वर्ष 2021 में 27 हजार के करीब सांस के रोगी पहुंचे थे। वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 32300 पर जा पहुंची। जनवरी से 29 अप्रैल तक सांस के रोगी 7 हजार के करीब इलाज के लिए पहुंचे हैं।
मास्क लगाकर निकलें
मेडिकल कॉलेज में फिजीशियन चेतन चौहान ने बताया कि सांस के रोगी बढ़ने का सबसे बढ़ा कारण शहर की सड़कों पर उड़ती धूल है। कोरोना से हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रभावित हुआ है। ऐसे में जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है,वह आसानी से सांस रोग का शिकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि बालक और बुजुर्ग रोगी अधिक हैं। प्रतिदिन कॉलेज में इमरजेंसी से लेकर ओपीडी में 70 से 75 सांस के रोगी पहुंच जाते हैं।
क्या नहीं खाना चाहिए
सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि दूध और दूध से बने पदार्थ सांस रोगी को नहीं लेने चाहिए। ठंडी चीजों के अलावा सिगरेट, बीड़ी आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए। वहीं धूल और धुआं से प्रमुख रूप से बचाव करें। बिना चिकित्सक की सलाह के कोई दवा न लें।
आंकड़ों पर एक नजर
वर्ष मरीज
2020 17345
2021 27000
2022 32300
2023 में अब तक - 7000