एटा। आचार संहिता लागू होने के बाद सभी राजनीतिक दलों ने निकाय चुनाव के लिए अपने-अपने स्तर से प्रयास तेज कर दिए हैं। पहली प्राथमिकता जिताऊ चेहरों की तलाश है। इसके लिए पदाधिकारी मंथन में जुटे हैं। जिन दावेदारों की फाइलें बन चुकी हैं, उन्हें पलटना शुरू कर दिया गया है। जबकि नए आवेदनों पर भी विचार-विमर्श की गुंजाइश अभी रखी गई है।निकाय चुनाव दिसंबर-जनवरी में प्रस्तावित था। इसी लिहाज से तमाम दावेदार अपने स्तर से तैयारियों में जुटे थे। एक ओर जहां संबंधित पार्टियों में आवेदन कर दिए तो दूसरी ओर जनता के बीच होर्डिंग-बैनर, समाजसेवा के जरिये प्रचार भी कर रहे थे, लेकिन दिसंबर में चुनाव टल गया। ऐसे में बाहरी तौर पर तो चुनाव प्रचार थम गया, लेकिन अंदरूनी रूप से पार्टी के टिकट पाने के लिए दावेदार पूरी ताकत लगातार झोंकते रहे। हालांकि अंत समय तक किसी भी दल ने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की।
रविवार को आचार संहिता लागू होने के बाद अब राजनीतिक दलों के पास भी ज्यादा समय नहीं रह गया है। वहीं दावेदारों का कहना है कि टिकट पक्की हो तो वह पूरी तरह चुनाव प्रचार में जुटें। क्योंकि नामांकन के बाद मतदान के बीच बहुत लंबा समय नहीं रखा गया है। ऐसे में प्रचार पहले से ही करना होगा। सभी राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्ष का कहना है कि दावेदारों के आवेदन पार्टी में पहुंच चुके हैं। अंतिम चरण में विचार-विमर्श चल रहा है। कभी भी प्रत्याशियों के नाम की सूची जारी की जा सकती है।