एटा। अलीगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत अंगरैया जमुनाई में दो साल से निर्माण सामग्री का भुगतान नहीं हुआ। इसमें आपूर्तिकर्ता ने सीधे-सीधे सीडीओ पर 10 प्रतिशत कमीशन के लिए भुगतान रोकने का आरोप लगाया है। डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायतें भेजी हैं। कहा गया है कि भुगतान के अभाव में उसका ईंट कारखाना ही बंद हो गया। जबकि भुगतान के लिए उच्च न्यायालय से भी आदेश हो चुका है।
यशपाल सिंह ने बताया कि जयशिव इंटरलॉकिंग ब्रिक्स प्लांट मोर्चा अंगरैया में संचालित करता था। 2020-21 व 2021-22 में उसने कुटेशन के आधार पर ग्राम पंचायत अंगरैया जमुनाई में इंटरलॉकिंग ईंटों की आपूर्ति की। काम होने के बाद भी दो साल तक भुगतान नहीं किया गया। इसके चलते वह कच्चा माल नहीं मंगा सका और उसका प्लांट बंद हो गया। कारखाने में लगे 11 से 15 मजदूरों का भी रोजगार बंद हो गया। प्रशासन द्वारा गठित की गई जांच कमेटी ने 26.63 लाख रुपये भुगतान शेष पाया था। सीधे-सीधे आरोप लगाया कि भुगतान न होने देने का प्रमुख कारण सीडीओ हैं। भुगतान के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन मांगते हैं।
बताया कि भुगतान न होने पर हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की। जिसे स्वीकृत कर हाईकोर्ट ने भुगतान किए जाने का आदेश डीएम को दिया। 23 मई 2023 को आदेश पारित कर तीन महीने में भुगतान का आदेश दिया था। इसके बावजूद भुगतान करने में रुचि नहीं ली जा रही है। जबकि प्लांट बंद रहने से मेरा व्यावसायिक, मानसिक उत्पीड़न हो रहा है।
जीएसटी में उलझाया
यशपाल का यह भी कहना है कि भुगतान को अटकाने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए गए। पहले अधिकारियों की जांच समिति बनाई, लेकिन जांच में सभी काम ठीक पाए गए। इसके बाद मेरे प्लांट का जीएसटी जमा न होने की बात कही गई। जबकि जीएसटी के लिए अलग विभाग जिम्मेदार है। इसका भुगतान से कोई संबंध ही नहीं है।
कमीशन मांगे जाने के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। कराए गए कार्यों की पहले समिति से जांच कराई गई। सब ठीक मिलने पर डीएम ने भुगतान का आदेश भी कर दिया है। ग्राम पंचायत से भुगतान निकलना है, जिसमें मेरी कोई भूमिका ही नहीं है। - डॉ. अवधेश कुमार बाजपेयी, सीडीओ