एटा। दिवाली के त्योहार को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क है। सीएमओ ने चिकित्सकों की 15 नवंबर तक की छुटि्टयां निरस्त कर दी हैं। दवाओं की उपलब्धता के साथ तैनाती स्थल न छोड़ने के निर्देश दिए हैं।
जिले में आठ सीएचसी संचालित है। ग्रामीण क्षेत्र के निवासी पहले सीएचसी पर ही इलाज के लिए पहुंचते हैं। दिवाली पर लोग पटाखे आदि चलाते हैं। ऐसे में आगजनी या पटाखों से जख्मी होने की घटना की आशंका रहती है। इसी को लेकर सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने चिकित्सकों की 15 नवंबर तक छुट्टियां निरस्त कर दी हैं। निर्देश दिए हैं कि सभी चिकित्सक ड्यूटी स्थल पर ही तैनात रहें। इसके साथ ही सीएचसी पर सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। 108 की 23 एंबुलेंस जिले में हैं, ऐसे में एंबुलेंस को खड़ा करने का स्थान सीएचसी के आस-पास ही रखा गया है। जरूरत पर तत्काल एंबुलेंस सीएचसी पर पहुंच जाएगी। वहीं मेडिकल कॉलेज में भी पूरे इंजताम किए गए हैं। कॉलेज में बर्न वार्ड नहीं है, लेकिन यहां पहुंचने वाले मरीजों का इमरजेंसी में ही इलाज किया जाएगा। जरूरत पर उसे रेफर किया जाएगा।
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चिकित्सक की सलाह
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. माधवेंद्र ने बताया अगर पटाखे जला रहे हैं तो हल्के बारूद वाले पटाखे जलाएं। इससे वायु व ध्वनि प्रदूषण कम होने के साथ ही चोट पहुंचने की आशंका भी कम रहती है। एक लकड़ी पर मोमबत्ती बांधकर रखें, जिससे कि पटाखे को आग लगाते समय दूरी बनी रहे।
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यह करें बचाव
- अगर व्यक्ति के कपड़ों में आग लग जाए तो उस पर पानी न डालें। कोई भी कंबल या सूती कपड़ा डालकर आग बुझाएं।
- अगर व्यक्ति अकेला है और आग लग जाए तो जमीन पर लेटकर शरीर को उलट-पुलट करे। इससे आग बुझ जाएगी।
- अगर पटाखे जलाते समय हाथ या अन्य शरीर पर बारूद लगा है तो ठंडे पानी से साफ करें।
- जले हुए हिस्से पर कोई तेल आदि न लगाएं, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
आंखों में नुकसान
मेडिकल कॉलेज की नेत्र रोग की विभागध्यक्ष डॉ. अंजु ने बताया पटाखे कई तरह के हाेते हैं। जैसे कोई जमीन पर जलने वाला है तो कोई ऊपर आसमान में जाकर जलता है। ऊपर जाने वाले पटाखे आंखों पर ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे पटाखों का प्रयोग करने से बचें और दूरी बनाकर जलाएं।