जो जितनी जमीन जोत ले, वह उसी की, इसी तर्ज पर यहां जमीनों पर कब्जा होता रहा है। सुन्नगढ़ी थाना क्षेत्र के किलौनी और किसौल के ग्रामीणों के बीच खूनी संघर्ष की घटना के बाद खादर की जमीन पर कब्जों के मामलों को लेकर चल रहे खेल की परतें खुलने लगीं हैं। जमीन पर कब्जा करने वालों में स्थानीय लोगों के अलावा पंजाब और हरियाणा के लोग भी शामिल है। संघर्ष की घटना में दर्ज हुई एफआईआर में एक नामजद आरोपी पंजाब का भी है।
खादर की जमीन पर कब्जों का खेल काफी पुराना है। लोग वर्षों से जमीन पर कब्जा जमाए हैं और खेती कर रहे हैं। ज्यादातर जमीनों पर रसुखदारों का कब्जा हैं। कुछ जमीनों के पट्टे तटवर्ती गांवों के किसानों के नाम पर है, लेकिन पट्टे से कई गुणा अधिक जमीन पर उन्होंने कब्जा किया हुआ है।
कब्जे के इस खेल में तहसील के लेखपालों की भी साठगांठ रहती है। जिस जमीन पर कब्जे को लेकर खूनी संघर्ष में पांच लोगों की मौत हुई, उसके आसपास हरियाणा और पंजाब के कुछ लोग भी जमीन घेर रहे हैं। किसौल पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में एक आरोपी बब्बल पंजाब का रहने वाला है।
कुछ जमीन खरीदने के बाद उसने इलाके काफी जमीन पर कब्जा जमा रखा है। इस युवक की आसपास के इलाके में रिश्तेदारियां भी बताई गईं हैं। ऐसे अन्य कई मामले हैं जहां बाहरी इलाके के लोग खादर की जमीन पर खेतीबाड़ी कर रहे हैं। गंगा के धारा बदल लेने से पटियाली के इलाके की ओर काफी जमीन गंगा छोड़ चुकी है। कादरगंज के असलम बताते हैं कि खादर की जमीन पर कब्जे का खेल बहुत पुराना है और यह सब लेखपालों की मिली भगत से चलता है।
ये है मामला
शनिवार को गंगा खादर में जमीन पर कब्जे के विवाद में गांव किलौनी और किसौल के लोगों के बीच फायरिंग हो गई थी। इसमें कि लौनी निवासी रामकिशोर, उसके भाई शिवराम, इसी गांव के सुखवीर और किसौल के रामरहीस और अमृतपाल की मौत हो गई थी।