जिले में 51 किमी से होकर गंगा गुजर रही है। जिसकी लाठी उसी की भैंस वाली कहावत की तर्ज पर यहां जमीनों पर कब्जा होता है। जो जितनी जमीन जोत ले, वो उसी की हो जाती है। असलाह के जोर पर यहां फसल बोई जाती है। शनिवार को हुए संघर्ष में भारी मात्रा में असलाह का प्रयोग किया गया। जमीन पर कब्जे के लिए यहां पहले भी संघर्ष होते रहे हैं।
गांव धार के नजदीक हैं और पानी कम होने पर लोग जमीन जोतकर खेती कर लेते हैं। सोरों, सहावर के गंगा की कटरी इलाकों में भी पटियाली जैसे हालात हैं। दो वर्ष पूर्व जमीन के कब्जे के लिए सोरों और बदायूं के किसानों के बीच संघर्ष की घटना हुई, इसमें कई लोग घायल भी हुए थे। सोरों के ग्रामीणों के बीच भी कई बार आपस में संघर्ष की घटनाएं हुईं हैं। छोटी मोटी घटनाएं तो आए दिन होती रहती है, जिनका पुलिस प्रशासन संज्ञान भी नहीं लेता। पटियाली क्षेत्र के म्यांसूर, शहवाजपुर, नगला ढाव, उलाई खेड़ा, नागर कंचनपुर सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां हर समय खूनी संघर्ष की आशंका बनी रहती है।
पटियाली के एसडीएम परवेज अहमद का कहना है कि खादर की जमीन के कोई पट्टे नहीं हैं। जब भी कब्जे की शिकायत होती है तो प्रशासन कार्रवाई करता है। उन्होंने बताया कि तहसीलदार के माध्यम से इसबार भी खादर की जमीन का सीमांकन कराया गया है।