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ब्रज में जिंदगी से हार मान पांच ने दी जान

Wed, 25 May 2016 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो एटा
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ब्रज में जिंदगी से हार मान पांच ने दी जान - फोटो : अमर उजाला
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ढ़ते कर्ज को बोझ, आर्थिक तंगी के चलते बेटी का इलाज न करा पाने का मलाल, घरेलू कलह के बाद आया आवेश और इन कारणों से उपजी हताशा ने चार लोगों को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया। एटा और मैनपुरी में दो-दो और फीरोजाबाद में एक व्यक्ति आत्महत्या कर ली। 
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 कर्ज का बोझ नहीं उठा पाया तो लगा ली फांसी
सिढ़पुरा क्षेत्र के गांव भुजपुरा में एक दलित मजदूर मुुकेश कुमार ने कर्ज के बढ़ते बोझ के चलते फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार रात खाना खाने के बाद वह भोजन करने के बाद कमरे में गया और फांसी लगा ली। उसकी पत्नी शकुंतला घरेलू काम करने के बाद कमरे में गई तो घटना का पता चला। बताया जा रहा है कि उस पर काफी कर्ज हो गया था और ब्याज भी लगातार बढ़ रहा था। इसके चलते वह मानसिक रुप से परेशान था।
बेटी का इलाज नहीं करा पाया तो खा लिया जहर
जालौन का रहने वाला था। वह गांव बावसा स्थित एक भट्ठे पर मजदूरी करता था। इसका परिवार भी भट्ठा पर रहता है। मृतक के पिता मूलचंद्र ने बताया कि ठेेकेदार उसे पांच सौ रुपये प्रति  हजार ईंट की दर पर ईंट पाथने के लिए लेकर आया था। लेकिन भट्ठा मालिक 450 रुपये ही देता था, जिसका वह विरोध भी करता था। होली के त्यौहार पर तय मजदूरी नहीं मिलने पर मजदूरों ने काम करना बंद कर दिया था। बाद में पांच सौ रुपये देने की बात कहने पर काम शुरू कर दिया गया था। उसके बाद भी मालिक तय रुपये नही देता था, जिसके चलते वह परेशान रहता था। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों से बाबूराम की बेटी की तबियत खराब थी, जिसे लेकर बेटे बाबूराम ने मालिक से रुपये मांगे थे,  लेकिन भट्टा मालिक ने रुपये नहीं दिए। परेशान होकर बाबूराम ने मंगलवार शाम जहर खाकर जान दे दी। लया। एसओ का कहना है कि थाने पर कोई जानकारी नहीं दी गई। बताया जाता है कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है।
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किसान ने फांसी लगाकर की आत्महत्या
 थाना बेवर के गांव परौंखा में बैंक के लोन और कर्जदारों के तगादे से परेशान किसान शांति स्वरूप ने बुधवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बुधवार सुबह उसका शव खेत में एक पेड़ से लटका मिला। उसके पुत्र नीलेश ने बताया कि पिता ने एक बैंक से लोन ले रखा था। कितना लोन लिया। इसकी जानकारी परिवारवालों को नहीं है। इस बार सूखे के चलते फसल भी खराब हो गई थी। कुछ अन्य लोगों से भी कर्ज लिया था। आए दिन लोगों के तगादे से वो परेशान रहते थे। परिवारीजनों ने बताया कि मृतक के तीन पुत्र  शैलेंद्र, नीलेश और संदेश हैं, तीनों ही मजदूरी करते हैं। उसके पास महज चार बीघा जमीन है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। 
रिटायर्ड सैनिक ने खुद को गोली से उड़ाया
गांव भरथरा में रिटायर्ड सैनिक महेश चंद्र जाटव (58) ने मंगलवार रात लाइसेंसी पिस्टल से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली। बताते हैं कि उनकी पत्नी की चार वर्ष पूर्व एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। घटना से पहले उनका पुत्रवधू से किसी बात पर विवाद हुआ था और उसके बाद वह को कमरे में सोने चले गए। इसी बीच उन्होंने खुद को लाइसेंसी पिस्टल से गोली मार ली। मौके पर पहुुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला। 
साहूकार की धमकी से आहत निगम कर्मी ने जान दी
कर्ज वसूली के लिए साहूकार व उसके गुर्गों की मारपीट और आए दिन के उत्पीड़न से परेशान होकर एक युवक राकेश वाल्मीकि ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
राकेश उत्तर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मायापुरी का रहने वाला था और नगर निगम में कर्मचारी था। निवासी राकेश कुमार वाल्मीकि (40) पुत्र रामचंद्र वाल्मीकि नगर निगम में कर्मचारी था। उसने मोहल्ले के ही एक युवक से 20 प्रतिशत की ब्याज दर पर कुछ रुपये उधार लिए थे। राकेश की पत्नी गुड्डी देवी ने बताया कि कर्जा चुकाने के बाद भी युवक ने 40 हजार रुपये निकाल दिए। राकेश ने रुपये देने से मना किया तो वह धमकी देने लगा। मंगलवार शाम को उसने राकेश के  घर आकर उसके साथ मारपीट भी की थी। इसके बाद राकेश मानसिक तनाव में आ गया। देर रात उसने जहर खाकर जान दे दी। इसकी जानकारी गुड्डी और उसके बच्चों को सुबह हुई। 
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