अवागढ़ थाना परिसर छावनी में तब्दील
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अवागढ़ थाने में शुक्रवार रात पथराव, फायरिंग, आगजनी के बाद शनिवार को थाना परिसर छावनी में तब्दील दिखाई दिया। पूरा बवाल यादव और लोधे राजपूत बिरादरी के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है। जबकि पुलिस के साथ मारपीट का मामला कहीं पीछे रह गया है। घायलों के पक्ष में लोधे राजपूत खड़े हैं तो आरोपियों को निर्दोष बताया जा रहा है। इसके चलते शनिवार को लोधे बिरादरी की कई चरणों में पंचायत हुई और कई बार आरोपियों के खिलाफ तहरीर थाने आकर लौट गई, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ है। वहीं शुक्रवार रात हुई फायरिंग, पथराव और आगजनी की घटना के बाद शनिवार को ग्रामीणों और नगर के लोगों का थाना परिसर के बाहर जमावड़ा लगा रहा। थाने के अदंर पुलिस, प्रशासन के अधिकारियों से कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि दिनभर अपने पक्ष की पैरोकारी करते दिखाई दिए।
शुक्रवार रात जिन लोगों को मैक्स वाहन में चोर समझ कर पकड़ा गया वो सभी तीन थाना क्षेत्र के अलग-अलग यादव बिरादरी के लोग हैं। जो लोग गोली लगने और पुलिस पिटाई से घायल हुए हैं वो लोधे राजपूत बिरादरी के हैं। मामला दो बिरादरी के बीच फंसने के कारण ग्रामीणों से पिटे पुलिसकर्मियों और थाने पर हुए पथराव में पुलिसकर्मियों के घायल होने का मामला कहीं पीछे छूट गया है। शुक्रवार रात बवाल के बाद शनिवार को दिन निकलते ही भारी संख्या में ग्रामीण और नगर के लोग थाने के बाहर एकत्र हुए।
वहीं मामले को लेकर दोनों बिरादरी के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अवागढ़ थाने में एकत्र होकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से अपने पक्ष की पैरोकारी दिखाई दिए। लोधे राजपूत पक्ष के वरिष्ठ लोगों की नगर में कई बार पंचायत हुई और तहरीर लिख कर थाने आने के बाद लौट गई। आरोपियों के पक्ष के लोग उन्हें निर्दोष बता रहे थे तो दूसरे पक्ष के लोग दोषी। तहरीर बदलने को लेकर जलेसर एसएचओ दिनेश चंद्र दुबे की कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष चोब सिंह बघेल से तीखी नोकझोंक हो गई। पूरे दिन चली उठा पटक और सत्तापक्ष का दवाब होने के बाद भी पुलिस दोनो पक्षों पर कार्रवाई करने की जिद पर अड़ी है।
ग्रामीणों पर फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या का प्रयास और थाने पर पथराव, फायरिंग करने वाले ग्रामीणाें पर भी रिपोर्ट दर्ज होगी। वहीं चोर समझ कर पकड़े गए लोगाें के खिलाफ जांच की जा रही है। यदि उनका वारदात से कोई सरोकार हुआ तो उन पर भी कार्रवाई होगी। शुक्रवार रात से लेकर थाने पर पथराव होने तक पुलिस की कोई गलती नहीं है। यदि पुलिस पांचों को बचा कर मौके से थाने नहीं लाती तो वहां कोई भी अनहोनी हो सकती थी।
अशोक कुमार त्रिपाठी , एसएसपी एटा