एटा। वीरांगना अवंतीबाई स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही सामने आई थी। इसके चलते चार बच्चों में एचआईवी होने का खतरा बन गया था। यहां वार्ड में भर्ती पांच बच्चों को एक सिरिंज से इंजेक्शन लगाने का आरोप था। इनमें से एक बच्ची एचआईवी से संक्रमित थी। इसके बाद बचाव के लिए चारों बच्चों का इलाज शुरू कर दिया गया था। एक माह बाद जांच करने के लिए शुक्रवार को इन बच्चों की जांच कराने के लिए परिजन को कॉल किए गए।
शहर निवासी सात वर्षीय बच्ची के पिता ने मार्च माह के प्रथम सप्ताह में मेडिकल कॉलेज के स्वास्थ्य कर्मियों पर आरोप लगाया था कि एचआईवी पीड़ित बच्ची को इंजेक्शन लगाने के बाद उसी सिरिंज से अन्य बच्चों को भी इंजेक्शन लगाए गए। शिकायत के बाद बच्चों को एचआईवी की प्रीकॉशन डोज शुरू कर दी गई थी। मामले में डिप्टी सीएम ने भी संज्ञान लिया था।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा बच्चों पर लगातार नजर रखी जा रही है। एक माह होने पर शुक्रवार को एआरटी सेंटर के कर्मचारियों ने बच्चों की जांच के लिए उनके परिजन को कॉल की। परिजन ने शनिवार व सोमवार में जांच कराने के लिए आने की बात कही। सीएमएस डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बच्चों की लगातार निगरानी की जा रही है। एक माह हो गया था इसलिए बच्चों की जांच के लिए कॉल किया गया।