एटा। राशन वितरण में पारदर्शिता के लिए सरकारी राशन की दुकानों पर तीसरी आंख (सीसीटीवी कैमरों) का सहारा लिया गया। तहसीलों से लेकर जिला पूर्ति कार्यालय पर कंट्रोल रूम से निगरानी शुरू कराई गई। अब इस सिस्टम पर ताला पड़ चुका है और राशन वितरण को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। निगरानी सरकारी कैमरे तो नहीं, कुछ सजग लोग अपनी मोबाइल कैमरों से जरूर कर रहे हैं, जिनके वीडियो आए दिन वायरल हो रहे हैं।
दो साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी अंकित अग्रवाल ने शुचिता के लिए पहल की थी। उस समय सभी 805 सरकारी राशन की दुकानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए थे। इनका कंट्रोल रूम तहसील और जिला पूर्ति कार्यालय में बनाया गया। कोटा डीलर और कांटे पर कैमरे की नजर रहती थी और अफसर निगरानी करते थे। ऐसे में घटतौली की शिकायतें कम भी हुईं। डीएम के स्थानांतरण के बाद यह व्यवस्था पूरी तरह बंद हो गई और सीसीटीवी कैमरे हट चुके हैं।
बांट रखकर की जा रही घटतौली
दुकानों पर घटतौली रोकने के लिए ई-वेइंग मशीन लगाई गई हैं। इसमें वजन पूरा होने पर ही पर्ची निकालती है। इसका तोड़ निकालते हुए डीलरों ने हर तोल पर बांट रखकर घटतौली शुरू कर दी है। पिछले दिनों कई दुकानों के इस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं।
वितरण के समय सीसीटीवी कैमरे चलते तो हैं लेकिन गड़बड़ी इनमें नहीं दिखाई देती है। संभव है छेड़खानी की गई हो। इन सबको दुरुस्त कराया जाएगा। - कमलेश कुमार गुप्ता, डीएसओ