एटा। सीएमओ कार्यालय में 72 नर्सिंग होम, पैथोलॉजी व क्लीनिक पंजीकृत हैं, लेकिन जिले में इससे तीन गुना से अधिक संचालित हो रहे हैं। विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद भी अपंजीकृत क्लीनिक नर्सिंग होम खुलने की होड़ लगी है। आम व्यक्ति को जानकारी नहीं हो पाती है कि कौन सा नर्सिंग होम पंजीकृत और कौन का अपंजीकृत है। इसी को लेकर सीएमओ ने निर्देश जारी किए है कि पंजीकृत नर्सिंग हाेम क्लीनिक संचालकों को बाहर बोर्ड लगाना होगा। उस पर पंजीकरण नंबर सहित चिकित्सकों के नाम भी लिखने होंगे।
शहर से लेकर देहात तक अपंजीकृत नर्सिंग होम का बोलबाला है। आए दिन इनमें किसी न किसी मरीज की जान जा रही है। क्यों कि वहां इलाज भी बिना डॉक्टरी की पढ़ाई किए लोग कर रहे हैं। जबकि नर्सिंग होम का जो बोर्ड लगा होता है उसमें फिजीशियन से लेकर सर्जन और विशेषज्ञों के नाम दर्ज होते हैं। ऐसे में आम व्यक्ति नर्सिंग होम पर इलाज के लिए पहुंच जाते हैं। उन्हें जानकारी ही नहीं होती है कि नर्सिंग होम पंजीकृत है या नहीं। इसी को लेकर सीएमओ डॉ. उमेश त्रिपाठी ने निर्देश जारी किए हैं कि कार्यालय में पंजीकृत नर्सिंग होम संचालक सहित पैथोलॉजी व क्लीनिक संचालक अपने-अपने प्रतिष्ठानों के बाहर बोर्ड लगाएं। उस पर पंजीकृत नंबर सहित जो चिकित्सक है उनके नाम लिखें। जिससे आम व्यक्ति को जानकारी हो सके कि यह नर्सिंग होम पंजीकृत है और यह अपंजीकृत। कहा कि निरीक्षण के दौरान अगर बोर्ड पर लिखे नाम वाले चिकित्सक नर्सिंग होम में नहीं मिले तो नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।