वर्ष 2009 के चुनाव में ऐतिहासिक रूप से सबसे कम 44.46 फीसदी हुआ मतदान
भाजपा से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े थे कल्याण सिंह, सपा ने दिया था समर्थन
राजीव वर्मा
एटा। सूबे के मुख्यमंत्री रहे चुके कल्याण सिंह (जिन्हें लोग बाबू जी कहकर संबोधित करते थे) 2009 में एटा लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने आए थे। उम्मीद लगाई जा रही थी कि इस बड़े कद के नेता के नाम पर बंपर मतदान होगा। लेकिन परिस्थिति उल्टी हो गईं। इस साल के चुनाव में एटा सीट पर ऐतिहासिक रूप से सबसे कम महज 44.46 फीसदी मतदान हुआ था।
राजनीतिक जानकार लोग इसकी तमाम वजह मानते हैं। दरअसल, कल्याण सिंह इससे पहले चुनाव में बुलंदशहर लोकसभा क्षेत्र के भाजपा से सांसद चुने गए थे। लेकिन पार्टी में उनके कद व सम्मान को लेकर उन्हें परिस्थितियां रास नहीं आ रही थीं। ऐसे में उन्होंने 2009 में भाजपा से बगावत कर दी और निर्दलीय चुनाव लड़ने एटा आए। यूं तो उनके समर्थकों का एटा में बड़ा वर्ग था। लेकिन इनमें से अधिकांश भाजपाई थे और चुनाव में उनका साथ देना भाजपा विरोध वाली बात हो गई थी। ऐसे में तमाम कल्याण सिंह समर्थक भाजपाई होने की वजह से ठिठक गए। उनके लिए यह अंतरद्वंद्व की स्थिति थी।
ठीक इसी तरह की स्थिति सपा के वोट के सामने भी थी। सपा ने कल्याण सिंह को समर्थन देते हुए अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। एक ओर जहां प्रत्याशी न उतारे जाने से यादव समर्थक नाराज थे। तो दूसरी ओर मुस्लिम समर्थकों को कल्याण सिंह का चेहरा रास नहीं आ रहा था। अयोध्या में बाबरी विध्वंस मामले को लेकर वह कट्टर हिंदूवादी नेता के रूप में पहचान बना चुके थे। ऐसे में ये दोनों मतदाता वर्ग भी असमंजस में फंस गए थे। नतीजा यह हुआ कि तमाम लोग इस उधेड़बुन में वोट देने ही नहीं निकले और 2009 का का चुनाव एटा के इतिहास में सबसे कम मतदान वाला चुनाव दर्ज हो गया। संवाद
कब कितना रहा मतदान प्रतिशत
1951 - 46.23
1957 - 54.67
1962 - 56.45
1967 - 58.84
1971 - 57.46
1977 - 66.96
1980 - 47.43
1989 - 54.04
1991 - 55.50
1996 - 46.90
1998 - 63.87
1999 - 57.39
2004 - 61.56
2009 - 44.46
2014 - 58.72
2019 - 61.65