एटा। जिले में बुखार का प्रकोप जारी है। बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज सहित निजी नर्सिंग होम में पहुंच रहे हैं। बीते वर्ष जांच का दायरा कम था। अगस्त तक 150 बुखार पीड़ितों की जांच में पांच डेंगू मरीज सामने आए थे। इस वार अगस्त माह तक 709 बुखार पीड़ितों की जांच हुई। इसमें 13 मरीज डेंगू के सामने आए हैं।
जिले में शायद ही ऐसा कोई गांव बचा हो जहां बुखार के मरीज न हों। अधिकांश बुखार पीड़ितों की जांच में कुछ नहीं निकल रहा है। उनके प्लेटलेट्स कम आ रहे हैं। ऐसे में चिकित्सक डेंगू का संदिग्ध मानकर उपचार कर रहे हैं। इस बार स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू-मलेरिया को फैलने से रोकने के इंतजाम तो किए गए। यहां तक कि लोगों को जागरूक करने के साथ मच्छर रोधी दवा का छिड़काव कराया गया। स्वास्थ्य शिविर लगा मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है।
लेकिन बीते वर्ष की तुलना में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। मलेरिया के जनवरी से अब तक जिले में 10 मरीज आए हैं। वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक लोकमन सिंह ने बताया कि संक्रामक रोगों की रोकथाम के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सूचना मिलते ही शिविर लगाकर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इस बार 31 अगस्त तक 709 डेंगू एलाइजा की जांच हुईं हैं। इसमें 13 मरीज सामने आए हैं।
पॉजिटिव आने के बाद कराई जाती है एलाइजा जांच
जिले में अगर कोई बुखार का पीड़ित रैपिड कार्ड से डेंगू पॉजिटिव आता है। उसके बाद उसकी डेंगू एलाइजा जांच कराई जाती है। यह रिपोर्ट पॉजिटिव आती तो उसमें डेंगू की पुष्टि कर दी जाती है।